राम मंदिर दान चोरी विवाद: अफवाहों पर विराम लगाने के लिए ट्रस्ट ने की SIT जांच की मांग
Ayodhya News: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित भव्य राम मंदिर के दान पात्रों से धनराशि चोरी होने के मामले में सोशल मीडिया और जनमानस में फैल रही तरह-तरह की अफवाहों पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। ट्रस्ट ने इस पूरे प्रकरण में लोगों के बीच बने भ्रम को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे संपर्क किया है और मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) से कराने का लिखित अनुरोध किया है।
ट्रस्ट का मानना है कि इस संवेदनशील मुद्दे पर अब चुप रहना ठीक नहीं है, क्योंकि इससे राम भक्तों की आस्था और मंदिर की छवि प्रभावित हो रही है।
ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री के सामने रखीं तीन प्रमुख मांगें
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्य सरकार का राम मंदिर से गहरा और भावनात्मक जुड़ाव रहा है। चूंकि एसआईटी (SIT) का गठन राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए ट्रस्ट ने सीधे मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हुए तीन मुख्य बिंदु सामने रखे हैं।
स्वतंत्र जांच: पूरे प्रकरण की गहराई से और बिना किसी बाहरी दबाव के निष्पक्षता से एसआईटी जांच कराई जाए।
दोषियों पर एक्शन: जांच की रिपोर्ट आने के बाद जो भी व्यक्ति इस वित्तीय अनियमितता या चोरी में संलिप्त पाया जाए, उसके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए।
अफवाहों पर रोक: समाज में फैल रही भ्रामक जानकारियों और अफवाहों पर पूर्ण विराम लगाया जाए।
कैंप कार्यालय प्रभारी का खुलासा, बैंक कर्मियों ने की गड़बड़ी
इस पूरे विवाद के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट कैंप कार्यालय के प्रभारी प्रकाश गुप्ता ने व्यवस्थागत खामियों और पूर्व में हुई लापरवाही को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने बताया कि पहले भी इस तरह की गड़बड़ी की जानकारी ट्रस्ट के संज्ञान में आई थी, लेकिन तब कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
प्रकाश गुप्ता के अनुसार, पहले दान पेटियों से एकत्रित कैश काउंटर पर आता था, जहां से ट्रस्ट के अधिकारी उसे बैंक भेजते थे। बाद में व्यवस्था बदलते हुए बैंक ने मंदिर परिसर के अंदर ही अपना काउंटर स्थापित कर दिया और अपने कर्मचारियों को तैनात कर दिया। कैश गिनने का काम भी सीधे बैंक के स्टाफ द्वारा ही किया जाता था, और शुरुआती स्तर पर इसी स्टाफ द्वारा गड़बड़ी को अंजाम दिया गया है।
उन्होंने महिपाल सिंह नामक व्यक्ति का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए बताया कि महिपाल ने पूर्व में इस हेरफेर को पकड़ा था और ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों को इसके प्रति सचेत भी किया था। परंतु, उस समय कोई त्वरित और ठोस कार्रवाई न होने से निराश होकर महिपाल सिंह वापस कोटा (राजस्थान) लौट गए थे।

