भरत तिवारी एनकाउंटर पर बोले कथावाचक अनिरुद्धाचार्य, सरकार काम नहीं करती, इसलिए बंदूक उठानी पड़ी
Vrindavan News: बिहार के भोजपुर जिले में भरत तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत के मामले ने अब धार्मिक कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की प्रतिक्रिया को भी जन्म दिया है। उन्होंने इस घटना पर सरकार और पुलिस के रवैये को लेकर तीखी टिप्पणी की है।
अनिरुद्धाचार्य ने कहा, सरकार काम तो करती नहीं है। उस लड़के ने काम के लिए अफसरों से कहा, जब नहीं किया तो उसने बंदूक उठा ली। उसने किसी की हत्या करने के लिए बंदूक नहीं उठाई, ना किसी का मर्डर किया, लेकिन पुलिस ने उसे मार डाला। जब नहीं सुनोगे तो किसी को तो खड़ा होना पड़ेगा।
जनता राजा को पापी कहेगी
कथावाचक ने आगे कहा, आप जनता की हत्या कर रहे हैं, ये राजा के लिए पाप है। ऐसे में जनता राजा को पापी कहेगी। राजा तो बड़ा पापी है, जो निर्दोष जनता को मारे डाल रहा है। शरण में आए हुए लोगों को कभी नहीं मारना चाहिए। कोई बहुत बड़ा अपराधी होता या आतंकवादी होता तो आप मारते कोई मनाही नहीं थी।
उन्होंने कहा, आतंकवादी और अपराधी को मार डालिए, जो 10-20 मर्डर किए हैं। जो गलत है, उसका एनकाउंटर कर दीजिए, जो सही है अपने गांव और समाज के लिए आवाज उठा रहा है, उसे ही मार डालोगे। आपका सिस्टम तो बहरा है। ये गलत है। कितनों को मारोगे फिर दूसरा खड़ा होगा।
शरण में आए हुए, व्यक्ति को मारना पाप है
पुलिस वालों को रामचरितमानस पढ़ना चाहिए।भरत तिवारी हत्याकांड मामले में प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य जी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।🔥 pic.twitter.com/xt3oq2I09t
— Voice Of Brahmins (@VoiceOfBrahmins) June 23, 2026
पुलिस को संस्कार देना चाहिए
अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि नेताओं को अपनी जनता से प्रेम करना चाहिए और वोट लेने के बाद उन्हें मरवाना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस को थोड़ा संस्कार भी देना चाहिए और रामचरितमानस का पाठ पढ़ाते कि शरण में आए हुए लोगों को मारना पाप है।
गौरतलब है कि भरत भूषण तिवारी (लगभग 30 वर्ष) भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड के बिलौटी गांव के निवासी थे। वह गंगा नदी के कटाव से प्रभावित अपने गांव और आसपास के लोगों की समस्या उठा रहे थे। पिछले दो वर्षों से बाढ़ और कटाव ने इलाके को तबाह कर दिया था, और पिछले वर्ष अकेले जवइनियां गांव के 600 से अधिक घर गंगा में समा गए थे।
16 जून 2026 को पुलिस भरत के घर पहुंची और उनके खिलाफ कार्रवाई की। अगले दिन 17 जून को मुठभेड़ में वह घायल हो गए और बाद में पटना के पीएमसीएच में उनकी मौत हो गई। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में जांच की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं।
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