कोविड ड्यूटी में जान गंवाने वाले लाइनमैन को क्यों नहीं मिले पैसे? हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

Allahabad High Court: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले से जुड़े एक दर्दनाक मामले में अब न्याय की उम्मीद जगी है। कोरोना काल के दौरान बिजली आपूर्ति बहाल करते समय जान गंवाने वाले लाइनमैन विकिलेश गौड़ के परिवार को 50 लाख रुपये की सहायता न मिलने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

कोर्ट ने प्रमुख सचिव (राजस्व) से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है और चेतावनी दी है कि 21 जुलाई से पहले जवाब न देने पर उन्हें खुद अदालत में पेश होना होगा।

कोरोना ड्यूटी में गई थी जान

गोरखपुर के गोपालपुर निवासी विकिलेश गौड़ विद्युत विभाग में लाइनमैन थे। 10 मई 2021 को, कोरोना महामारी के दौरान, वह बिजली सप्लाई बहाल करने के काम में लगे थे। इसी दौरान कोरोना संक्रमित होने से उनकी मौत हो गई। जिला प्रशासन ने उन्हें फ्रंटलाइन वर्कर मानते हुए 50 लाख रुपये की सहायता के लिए शासन को पत्र भेजा था।

14 परिवारों को मिला मुआवजा, एक को नहीं

विकिलेश समेत कुल 15 कर्मचारियों के नाम भेजे गए थे। इनमें से 14 कर्मचारियों के परिजनों को मुआवजा मिल गया, लेकिन विकिलेश के परिवार को इससे वंचित रखा गया। दो-दो जिलाधिकारियों ने भी लिखित रूप में उन्हें फ्रंटलाइन वर्कर बताया, फिर भी शासन ने 28 जुलाई 2023 को फाइल बंद कर दी।

इंसाफ की लड़ाई और हाईकोर्ट का आदेश

लंबे संघर्ष और पिता निर्मल गौड़ की सदमे से मौत के बाद, विकिलेश की पत्नी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने शासन का आदेश रद्द करते हुए 50 लाख रुपये भुगतान का निर्देश दिया था। अब इस आदेश का पालन न होने पर अदालत ने प्रमुख सचिव से जवाब तलब किया है।

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