Lucknow News: भारतीय अंगदान दिवस पर वॉकाथॉन, 300 से अधिक लोगों ने लिया हिस्सा
‘अंगदान-जीवन संजीवनी अभियान’ के तहत हजरतगंज में निकली जागरूकता रैली
Lucknow News: भारतीय अंगदान दिवस के अवसर पर स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (SOTTO), उत्तर प्रदेश ने संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के अस्पताल प्रशासन विभाग के सहयोग से रविवार को हजरतगंज में अंगदान जागरूकता वॉकाथॉन का आयोजन किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को अंगदान के महत्व के प्रति जागरूक करना और अधिक से अधिक लोगों को मरणोपरांत अंगदान के लिए प्रेरित करना था।
वॉकाथॉन को कार्यवाहक निदेशक प्रो. शालीन कुमार, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के विशिष्ट सचिव धीरेंद्र सिंह सचान (आईएएस), अपर निदेशक चिकित्सा शिक्षा नीलम (आईएएस) तथा अन्य अतिथियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
यह आयोजन स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन के संयुक्त निदेशक एवं एसजीपीजीआई के अस्पताल प्रशासन विभागाध्यक्ष प्रो. आर. हर्षवर्धन के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
300 से अधिक लोगों ने दिखाई सहभागिता
हजरतगंज चौराहे से शुरू होकर एलेन सॉली स्टोर तक और फिर वापस हजरतगंज पहुंची करीब 1.6 किलोमीटर लंबी इस वॉकाथॉन में 300 से अधिक चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, मेडिकल छात्रों, स्वयंसेवी संगठनों और आम नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इस दौरान प्रतिभागियों ने अंगदान का वैश्विक प्रतीक माने जाने वाले हरे रिबन की मानव श्रृंखला भी बनाकर जागरूकता का संदेश दिया।
एक अंगदाता बचा सकता है आठ लोगों की जान
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि एक मृतक अंगदाता आठ लोगों को नया जीवन दे सकता है, जबकि ऊतक दान से करीब 75 लोगों के जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है।
इसके बावजूद देश में अंगों की मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में हर वर्ष हजारों मरीज हृदय, लिवर, किडनी और अन्य अंगों की विफलता के कारण समय पर प्रत्यारोपण न मिलने से अपनी जान गंवा देते हैं।
वर्ष 2024 में देश में 18,911 अंग प्रत्यारोपण किए गए, जिनमें 3,403 प्रत्यारोपण मृतक अंगदाताओं के अंगों से संभव हो सके। इसी उपलब्धि के साथ भारत अंग प्रत्यारोपण के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।
अंगदान को बताया मानवता की सबसे बड़ी सेवा
वक्ताओं ने कहा कि अंगदान केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रतीक है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अंगदान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करें, अपने परिवार के साथ इस विषय पर खुलकर चर्चा करें और मरणोपरांत अंगदान का संकल्प लेकर किसी जरूरतमंद को नया जीवन देने में अपनी भूमिका निभाएं।

