Kanpur News: बड़े ही तज़क व एहतेशाम के साथ शहर में मनाया गया जश्न-ए-आला हज़रत

Kanpur News: कानपुर के गदियाना स्थित अक़्सा जामा मस्जिद में ऑल इंडिया ग़रीब नवाज़ काउंसिल के तत्वावधान में जश्न-ए-आला हज़रत का आयोजन बड़े ही अदब और एहतेशाम के साथ किया गया। मुख्य वक्ता हज़रत मौलाना मोहम्मद हाशिम अशरफ़ी ने आला हज़रत इमाम अहमद रज़ा ख़ान फ़ाज़िल-ए-बरेलवी की दीनी और समाजी खिदमात पर रोशनी डालते हुए कहा कि वे 50 से अधिक विषयों के ज्ञाता थे। उन्होंने महज 8 साल की उम्र में अरबी भाषा में ग्रंथ रचा और 13 वर्ष की आयु में तमाम दीनी उलूम हासिल कर फ़तवा-निगारी शुरू कर दी थी।

मौलाना अशरफ़ी ने बताया कि आला हज़रत का लिखा कुरआन का उर्दू तर्जुमा ‘कंज़ुल ईमान’ और फिकह का विशाल ग्रंथ ‘फ़तावा रज़विया’ आज भी उलमा के लिए मार्गदर्शन का मुख्य आधार हैं। इसके अलावा उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी, जेनेटिक्स, फ्लूइड डायनेमिक्स, टेलीकम्युनिकेशन, टोपोलॉजी और भूकंप विज्ञान जैसे आधुनिक वैज्ञानिक विषयों पर भी महत्वपूर्ण शोध पत्र लिखे थे। उनका काव्य संग्रह ‘हदाइक़-ए-बख़्शिश’ उनकी उच्चस्तरीय अदबी समझ का प्रमाण है।

कार्यक्रम में आला हज़रत के जीवनवृत्त पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि उनका जन्म 14 जून 1856 को बरेली में हुआ था। पूरी जिंदगी उम्मत को इल्म, इश्क़-ए-रसूल, न्याय, भाईचारे और खिदमत-ए-इंसानियत का संदेश देने के बाद 1921 में उनका विसाल हुआ। उनका मज़ार आज भी दुनिया भर के करोड़ों अकीदतमंदों की ज़ियारतगाह बना हुआ है।

मुल्क में अमन-ओ-अमान और तरक्की की दुआ के साथ संपन्न हुआ कार्यक्रम

कार्यक्रम का शुभारंभ हाफ़िज़ मुहम्मद मुश्ताक़ अशरफ़ी की तिलावत-ए-क़ुरआन से हुआ, जिसके बाद नअत व मनक़बत पेश की गई। कार्यक्रम के समापन पर देश में शांति, सौहार्द और खुशहाली के लिए विशेष दुआ की गई। इस दौरान भारी संख्या में स्थानीय नागरिक, उलमा और अकीदतमंद मौजूद रहे।

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