कांग्रेस का ऐलान, गठबंधन का चेहरा होंगे अखिलेश यादव, सितंबर से शुरू होगी सीट शेयरिंग की बात

Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक पारा तेजी से चढ़ने लगा है। नेताओं के बीच दावों और जुबानी हमलों का दौर जारी है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के उस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कांग्रेस नेता से मुलाकात या संपर्क होने की बात कही थी।

राजेंद्र पाल गौतम ने राजभर के दावे पर तीखा पलटवार करते हुए कहा, अगर हमारी कोई मुलाकात हुई है तो वह उसकी तस्वीर सार्वजनिक करें। मेरी अभी तक न तो उनसे प्रत्यक्ष तौर पर कोई मुलाकात हुई है और न ही फोन पर कोई बातचीत। समझ में नहीं आता कि वह इस तरह की आधारहीन बातें क्यों कर रहे हैं।

सितंबर से शुरू होगी सीट शेयरिंग पर चर्चा

विपक्षी गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कांग्रेस प्रभारी ने कहा कि अगले महीने यानी सितंबर से गठबंधन के सहयोगियों के साथ औपचारिक बातचीत शुरू होने की संभावना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सितंबर में शुरू होने वाली यह चर्चा अक्टूबर तक पूरी कर ली जाएगी और सीटों पर आपसी सहमति बनाकर प्रत्याशियों के टिकट वितरण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी जाएगी।

अखिलेश यादव के चेहरे पर लड़ेंगे चुनाव

गठबंधन में सीटों के समीकरण पर राजेंद्र पाल गौतम ने जोर देकर कहा कि सीटों का बंटवारा सम्मानजनक आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहा, हमारा मुख्य लक्ष्य प्रदेश में सरकार बनाना है। चुनाव में हम अखिलेश यादव के चेहरे को ही आगे रखकर मैदान में उतर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी हमेशा बड़ा दिल रखती है और हमें पूरी उम्मीद है कि हमारे सहयोगी दल भी बड़ा दिल दिखाएंगे।

जब उनसे सवाल पूछा गया कि क्या कांग्रेस 2017 के विधानसभा चुनाव के बराबर सीटों की मांग करेगी, तो उन्होंने कोई निश्चित संख्या बताने से परहेज करते हुए केवल इतना कहा कि सम्मानजनक शब्द से ही हमारी मंशा का अंदाजा लगाया जा सकता है।

जाति जनगणना के मुद्दे पर केंद्र को घेरा

इसके साथ ही राजेंद्र पाल गौतम ने जाति जनगणना को आगामी चुनावों का सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा करार दिया। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को इस मुद्दे की गंभीरता का अंदाजा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे जाति जनगणना के प्रारूप में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग से कोई कॉलम ही शामिल नहीं किया गया है, जो इस वर्ग के साथ अन्याय है।

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