अनिल अंबानी को सुप्रीम कोर्ट से झटका, हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने से किया इनकार
Sandesh Wahak Digital Desk: रिलायंस कम्युनिकेशंस लोन फ्रॉड केस में अनिल अंबानी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उद्योगपति अनिल अंबानी को बड़ी राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें बैंकों द्वारा उनके ऋण खातों (Loan Accounts) को धोखाधड़ी (Fraud) के रूप में वर्गीकृत करने के खिलाफ मिली अंतरिम सुरक्षा को हटा दिया गया था।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने अंबानी की याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि सार्वजनिक धन के गबन और हेराफेरी से जुड़े गंभीर आरोपों की जांच चल रही है। जब अंबानी के वकील कपिल सिब्बल ने बैंकों के फोरेंसिक ऑडिट की योग्यता पर सवाल उठाया, तो पीठ ने टिप्पणी की कि राष्ट्रीयकृत बैंकों ने सेवाएं ली हैं। वे बेहतर जानते हैं कि कौन सबसे अच्छा है, क्या हम उनकी बुद्धिमत्ता की जगह ले सकते हैं? यह उनका पैसा है!
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि किसी व्यवसायी को धोखेबाज करार देना उसके लिए नागरिक मृत्यु (Civil Death) के समान है। उन्होंने कहा, अगर मुझे धोखेबाज कहा गया, तो कोई भी मुझे भविष्य में पैसा उधार नहीं देगा। उन्होंने तर्क दिया कि बैंकों द्वारा किया गया फोरेंसिक ऑडिट आरबीआई के 2024 के मास्टर निर्देशों के अनुरूप नहीं था।
क्या है पूरा विवाद
यह मामला रिलायंस कम्युनिकेशंस और उसकी सहयोगी संस्थाओं को दिए गए ऋणों से जुड़ा है।
अक्टूबर 2020: बीडीओ इंडिया एलएलपी द्वारा एक फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट तैयार की गई थी।
दिसंबर 2025: बॉम्बे हाई कोर्ट की एकल पीठ ने इस रिपोर्ट पर रोक लगा दी थी।
2024 निर्देश बनाम 2016 ढांचा: खंडपीठ ने बाद में सुरक्षा हटा दी, यह मानते हुए कि 2020 का ऑडिट तत्कालीन (2016) नियमों के तहत था और 2024 के नए निर्देश इसे स्वतः अमान्य नहीं कर सकते।
Also Read: दिल्ली एयरपोर्ट के रनवे पर स्पाइसजेट और आकासा एयर के बीच हुई भिड़ंत, बाल-बाल बचे यात्री

