‘महिला आरक्षण के नाम पर OBC का हक छीन रही सरकार’, प्रियंका गांधी का केंद्र पर प्रहार

Sandesh Wahak Digital Desk: लोकसभा में गुरुवार को महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को लेकर जुबानी जंग देखने को मिली। जहां एक ओर विपक्ष महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर सत्ता पक्ष को घेरने की कोशिशों में रहा। वहीं सत्ता पक्ष से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आंकड़ों के माध्यम से दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंताओं को दूर करने की कोशिश की।

‘नारी को नारा न बनाए भाजपा’- प्रियंका गांधी

प्रियंका गांधी ने चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि महिला आरक्षण का विचार सबसे पहले कांग्रेस और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी लाए थे, लेकिन तब भाजपा ने ही इसका विरोध किया था। उन्होंने वर्तमान विधेयक पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री इसे तकनीकी मुद्दा बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं, जबकि असल में वे जातीय जनगणना से घबरा रहे हैं। सरकार इस विधेयक के जरिए ओबीसी वर्ग का हक छीनना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना सर्वदलीय बैठक और बिना चर्चा के विधेयक लाना विपक्ष को ‘धर्मसंकट’ में डालने की कोशिश है। कांग्रेस सांसद ने पूछा कि सरकार मौजूदा 543 सीटों में ही 33% आरक्षण क्यों नहीं लागू कर देती? सीटों को 850 करने और परिसीमन के पीछे राजनीतिक साजिश की बू आ रही है।

अमित शाह का पलटवार: ‘दक्षिण की शक्ति कम नहीं, बढ़ेगी’

प्रियंका गांधी के आरोपों और दक्षिण भारतीय राज्यों में सीटों के घटने के डर पर गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने साफ किया कि परिसीमन के बाद दक्षिण के राज्यों का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा।

सीटों का नया गणित (अमित शाह के अनुसार):

राज्य वर्तमान सीटें (प्रतिनिधित्व %) परिसीमन के बाद (प्रस्तावित %)
कर्नाटक 28 (5.15%) 42 (5.15% – यथावत)
आंध्र प्रदेश 25 (4.60%) 38 (4.65%)
तेलंगाना 17 (3.13%) 26 (3.18%)
तमिलनाडु 39 (7.18%) 59 (7.23%)

अमित शाह ने स्पष्ट किया कि दक्षिण के 129 सांसदों की वर्तमान हिस्सेदारी 23.76% है, जो परिसीमन के बाद 150 सांसदों के साथ 23.97% हो जाएगी। उन्होंने ‘साउथ नैरेटिव’ को भ्रम फैलाने की कोशिश करार दिया।

जातीय जनगणना और परिसीमन पर फंसा पेंच

कांग्रेस ने मांग की है कि महिला आरक्षण 2029 तक लागू होना चाहिए, लेकिन इसके लिए जातिगत जनगणना अनिवार्य है। प्रियंका गांधी ने कहा कि 1971 की जनगणना के आधार पर जो रोक लगाई गई थी, उसे सरकार नियमों को ताक पर रखकर बदलना चाहती है।

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