Azam Khan की मुश्किलें बढ़ीं, जौहर ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन हुआ रद्द, चंदा वसूली पर सवाल
UP News: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान (Azam Khan) की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। आयकर विभाग ने मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। विभाग का कहना है कि ट्रस्ट की गतिविधियां जनहित के अनुरूप नहीं थीं और इसके संचालन में कई गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं।
आयकर विभाग के इस फैसले के बाद ट्रस्ट की गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ेगा। साथ ही ट्रस्ट से टैक्स, ब्याज और जुर्माने की वसूली का रास्ता भी साफ हो गया है। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई के बाद ट्रस्ट भविष्य में किसी प्रकार की नई गतिविधि संचालित नहीं कर सकेगा।
जांच में क्या मिला?
आयकर विभाग की जांच में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट पर लोगों से दबाव बनाकर चंदा लेने, डमी ट्रस्टी नियुक्त करने और जनहित के उद्देश्य से हटकर काम करने के आरोप सामने आए हैं। इन्हीं आधारों पर विभाग ने रजिस्ट्रेशन रद्द करने का फैसला लिया।
विभागीय आदेश के अनुसार, 13 सितंबर 2023 को आयकर अधिनियम की धारा 132 के तहत Azam Khan और उनसे जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ तलाशी अभियान चलाया गया था। इसी दौरान जुटाई गई जानकारी के आधार पर ट्रस्ट की गतिविधियों की विस्तृत जांच शुरू हुई।
जांच के बाद वित्तीय वर्ष 2020-21 से 2023-24 तक के मामलों का आकलन किया गया, जिसमें कई बिंदुओं पर नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई।
Azam Khan की भूमिका भी जांच के दायरे में
आदेश में कहा गया है कि जौहर ट्रस्ट का संचालन मुख्य ट्रस्टी के रूप में आजम खान करते हैं। ट्रस्ट से उनके परिवार के कुछ सदस्य और अन्य ट्रस्टी भी जुड़े हुए हैं। ट्रस्ट के अंतर्गत रामपुर पब्लिक स्कूल और मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय का संचालन भी किया जाता है।
गौरतलब है कि मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2006 में हुई थी और इसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से मान्यता प्राप्त है। आजम खान इस विश्वविद्यालय के आजीवन कुलाधिपति (लाइफ टाइम चांसलर) हैं।
आयकर विभाग की इस कार्रवाई को Azam Khan के लिए एक बड़े कानूनी और वित्तीय झटके के तौर पर देखा जा रहा है। पहले से कई मामलों का सामना कर रहे सपा नेता के लिए यह फैसला नई मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
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