बरेली: परामर्श केंद्र की पहल से महकी खुशियां, उजड़ने की कगार पर खड़े तीन परिवारों का हुआ पुनर्मिलन
आंवला कोतवाली में सलाहकारों ने कराई 'अपनों की घर वापसी'— भमोरा थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद भी एक हुए पति-पत्नी; टूटे रिश्तों में फिर घुली प्यार की मिठास
Sandesh Wahak Digital Desk: समाज में टूटते परिवारों और बिखरते रिश्तों के बीच बरेली की आंवला कोतवाली स्थित परामर्श केंद्र से राहत भरी खबर सामने आई है। बुधवार को परामर्श केंद्र के सलाहकारों ने अपनी सूझबूझ और धैर्यपूर्ण मध्यस्थता से तीन ऐसे परिवारों को फिर से एक कर दिया, जो आपसी विवाद के कारण अलग हो चुके थे।
मुकदमा दर्ज होने के बाद भी सुलझा विवाद
परामर्श केंद्र की इस बार की सबसे बड़ी उपलब्धि याशमीन बनाम जैनुल आबेदीन का मामला रहा।
भमोरा थाने का केस: इस मामले में थाना भमोरा में मुकदमा संख्या 52/26 पंजीकृत हो चुका था। कानूनी कार्रवाई के बीच रिश्तों में काफी कड़वाहट आ गई थी।
परामर्श केंद्र के अध्यक्ष जय गोविन्द सिंह ने बताया कि मुकदमा दर्ज होने के बावजूद सलाहकारों ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर इस विवाद की सुखद परिणति कराई और पति-पत्नी साथ रहने को तैयार हो गए।

दो अन्य परिवारों की भी हुई ‘घर वापसी’
इसके अलावा दो अन्य महत्वपूर्ण मामलों में भी सफलता मिली।
शमा पत्नी नदीम (निवासी ताड़गंज, आंवला): लंबे समय से चल रहे मनमुटाव को खत्म कर शमा और नदीम ने फिर से साथ जीवन बिताने का संकल्प लिया।
रेशमा पुत्री हनीफ (निवासी अनूपपुरा, आंवला): विघटित हो चुके इस परिवार में भी सलाहकारों की मेहनत रंग लाई और रेशमा का घर बस गया।
इन सलाहकारों का रहा विशेष सहयोग
रिश्तों को जोड़ने की इस मुहिम में टीम वर्क ने अहम भूमिका निभाई। परामर्श केंद्र के अध्यक्ष जय गोविन्द सिंह के साथ सलाहकार रमाकांत तिवारी, रामदीन सागर, शोखी अग्रवाल, रजिया सुल्तान, योगेश माहेश्वरी, सीमा रजा और महिला आरक्षी शीतल नौटियाल का विशेष सहयोग रहा।
रिपोर्ट: रंजीत बिसारिया
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