Lucknow News: 6.37 करोड़ के LIC घोटाले का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, CBI ने मेट्रो स्टेशन से दबोचा

Sandesh Wahak Digital Desk: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने करोड़ों रुपये के हाई-प्रोफाइल एलआईसी घोटाले में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी समीर जोशी को लखनऊ के एक मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। आरोपी को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। समीर जोशी पर फर्जी पॉलिसियों और नकली चेक के माध्यम से सरकारी धन के गबन का गंभीर आरोप है।

क्या है 6.37 करोड़ का यह पूरा मामला?

यह घोटाला वर्ष 2006 से 2010 के बीच अंजाम दिया गया था, जिसकी परतें 2012 में खुलीं। LIC लखनऊ की शिकायत पर 13 अगस्त 2012 को मामला दर्ज हुआ था। जांच में पाया गया कि आरोपियों ने फर्जी पॉलिसी धारकों के नाम पर नकली चेक तैयार किए और एलआईसी फंड का दुरुपयोग किया। फरवरी 2006 से अगस्त 2010 के बीच कुल 6.37 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई। समीर जोशी ने एलआईसी के तत्कालीन सहायक पंकज सक्सेना के साथ मिलकर अपनी पत्नी अंजू जोशी और कर्मचारी जितेंद्र कुमार के नाम पर करीब 62 लाख रुपये के फर्जी चेक बनवाकर राशि का गबन किया था।

जमानत के बाद हो गया था फरार

CBI ने इस मामले में 21 अगस्त 2014 को समीर जोशी समेत 12 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। गिरफ्तारी के बाद समीर को जमानत मिल गई थी, लेकिन वह अदालत की कार्यवाही से बचने के लिए फरार हो गया। लगातार पेश न होने पर 24 दिसंबर 2025 को अदालत ने उसे आधिकारिक तौर पर ‘भगोड़ा’ घोषित कर दिया था, जिसके बाद से ही सीबीआई की टीम उसकी तलाश में जुटी थी।

मेट्रो स्टेशन पर बिछाया गया जाल

सीबीआई को सूचना मिली थी कि समीर जोशी लखनऊ में ही छिपा है। सटीक इनपुट के आधार पर टीम ने लखनऊ के एक मेट्रो स्टेशन पर घेराबंदी की और उसे गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी को भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआई की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।

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