पेपर लीक के खिलाफ कभी खाई थी लाठी, अब उसी मुद्दे पर धर्मेंद्र प्रधान को देना पड़ा इस्तीफा

Dharmendra Pradhan: करीब 50 दिनों तक चले छात्र आंदोलन और NEET पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया। इस्तीफा देने के बाद प्रधान ने सोशल मीडिया पर कहा कि उन्होंने यह फैसला इसलिए लिया ताकि “राष्ट्रविरोधी ताकतें” हालात का गलत फायदा न उठा सकें और भ्रम न फैला सकें।

57 वर्षीय धर्मेंद्र प्रधान भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं। उनकी राजनीति का एक दिलचस्प संयोग यह है कि जिस पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन से उनका राजनीतिक सफर मजबूत हुआ था, उसी तरह के विवाद के बाद उन्हें शिक्षा मंत्री का पद छोड़ना पड़ा।

1997 के आंदोलन ने दिलाई पहचान

साल 1997 में ओडिशा में कांग्रेस की सरकार थी और राज्य में परीक्षा प्रश्नपत्र लीक का मामला सामने आया था। उस समय अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के राष्ट्रीय सचिव रहे धर्मेंद्र प्रधान के नेतृत्व में करीब 1,500 छात्रों ने भुवनेश्वर सचिवालय का घेराव किया था।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें धर्मेंद्र प्रधान गंभीर रूप से घायल हुए और उन्हें कई फ्रैक्चर आए। उनके साथ रहे वर्तमान में आरएमडी डिग्री कॉलेज के प्राचार्य प्रशांत राउत ने कहा कि उस दौरान उन पर जानलेवा हमला भी हुआ था और वह मुश्किल हालात से बाहर निकले थे।

छात्र नेता से केंद्रीय मंत्री तक का सफर

धर्मेंद्र प्रधान ने 18 साल की उम्र में छात्र राजनीति शुरू की और 1994 से 1997 के बीच दो बार ABVP के राष्ट्रीय सचिव रहे। 1997 के आंदोलन के बाद वह भाजपा में शामिल हुए और संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। वर्ष 2024 में ओडिशा में भाजपा की पहली सरकार बनने में भी उन्हें प्रमुख रणनीतिकार माना गया। उन्होंने पेट्रोलियम, कौशल विकास और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली। 2021 में उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया गया था।

इस्तीफे के बाद प्रधान ने कहा कि उन्होंने चार दशक से अधिक समय छात्रों, शिक्षकों और शिक्षा सुधारों के लिए काम किया है। उन्होंने 3 मई को हुई NEET-UG परीक्षा में अनियमितताओं की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य हमेशा यह रहा कि किसी भी योग्य छात्र के साथ अन्याय न हो। उन्होंने कहा, “पिछले 10 दिनों की घटनाओं ने मुझे दुखी किया है। यह मेरी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि देश की युवा शक्ति के सम्मान का विषय है।”

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