नागरिकता से पहले सोनिया गांधी का नाम वोटर लिस्ट में कैसे, कोर्ट ने दिया एक हफ्ते में जवाब देने का आदेश

Sandesh Wahak Digital Desk: भारत की नागरिकता से पहले वोटर लिस्ट में नाम शामिल होने के मामले में कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सोनिया गांधी के खिलाफ मतदाता सूची में नाम शामिल करने के मामले में चल रही आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर शनिवार को दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने सोनिया गांधी के वकील को याचिकाकर्ता के दावों पर एक सप्ताह के भीतर अपना आधिकारिक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 मई को होनी है।

अधिवक्ता विकास त्रिपाठी द्वारा दायर इस याचिका में सोनिया गांधी पर भारत की नागरिकता मिलने से पूर्व ही फर्जीवाड़ा कर मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि सोनिया गांधी को भारत की नागरिकता 1983 में मिली थी, जबकि उनका नाम 1980 में ही दिल्ली की मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया था। आरोप है कि उस समय राजनीतिक रसूख और फर्जी दस्तावेजों के जरिए नियमों का उल्लंघन किया गया। याचिका में कहा गया है कि 1980 में नाम जुड़ने के बाद इसे 1982 में हटाया गया और फिर 1983 में दोबारा जोड़ा गया।

शनिवार की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अपनी दलीलें पूरी कर ली हैं। उन्होंने कोर्ट से चुनाव आयोग की एक संबंधित रिपोर्ट पेश करने की अनुमति भी मांगी है। दूसरी ओर, सोनिया गांधी के वकील ने कहा कि वे अपने मुवक्किल के पक्ष में कुछ पुख्ता सबूत पेश करना चाहते हैं।

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