असम में हिमंता ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बन रचा इतिहास, शपथ ग्रहण में उमड़ा दिग्गज नेताओं का हुजूम
Sandesh Wahak Digital Desk: असम की राजनीति में मंगलवार का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। गुवाहाटी में आयोजित एक भव्य समारोह में हिमंता बिस्वा सरमा ने लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस शपथ के साथ ही वे असम के इतिहास में लगातार दो कार्यकाल पूरा करने वाले पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बन गए हैं। राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह असम में एनडीए की लगातार तीसरी सरकार है, जिसने 2016 से राज्य की सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी है।
“মই, হিমন্ত বিশ্ব শৰ্মা…”
All rise for Hon’ble Chief Minister of Assam, Mananiya Dr. @himantabiswa !
NDA 3.0 is going to be Legendary!#BJPAssamHattrick pic.twitter.com/3H7M9iS7oL
— Ashok Singhal (@TheAshokSinghal) May 12, 2026
पीएम मोदी समेत दिग्गज रहे मौजूद
गुवाहाटी में हुआ यह समारोह एनडीए के बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा गया। इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन विशेष रूप से मौजूद रहे। इनके अलावा एनडीए शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री भी इस समारोह में शामिल हुए।
हिमंता बिस्वा सरमा का राजनीतिक सफर किसी मिसाल से कम नहीं है। 2015 में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले सरमा ने पूर्वोत्तर में पार्टी की किस्मत बदल दी। 2015 में जब वे भाजपा में आए, तब पार्टी के पास केवल 5 विधायक थे।
2016 में उन्हें नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस का संयोजक बनाया गया, जिसके जरिए उन्होंने क्षेत्रीय दलों को भाजपा के साथ जोड़कर पूरे पूर्वोत्तर को कांग्रेस मुक्त करने में बड़ी भूमिका निभाई। वह 2001 से जालुकबारी विधानसभा सीट से लगातार विधायक हैं और आज तक वहां से कोई उन्हें हरा नहीं सका है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की शैक्षणिक पृष्ठभूमि अत्यंत सुदृढ़ है। गुवाहाटी के प्रतिष्ठित कॉटन कॉलेज से राजनीति विज्ञान में एमए करने के बाद उन्होंने कानून (LLB) की पढ़ाई की और हाईकोर्ट में वकालत भी की।
पीएचडी धारक मुख्यमंत्री: साल 2006 में उन्होंने गुवाहाटी विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि हासिल की। उनके शोध का विषय पूर्वोत्तर परिषद (NEC) की कार्यप्रणाली और विकास में उसकी भूमिका पर आधारित था।
छात्र राजनीति की नींव: 1991-92 में कॉटन कॉलेज छात्र संघ के महासचिव के रूप में उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत हुई थी।

