Warning For Trump: ईरान संकट से ट्रंप की बढ़ी मुश्किलें, अमेरिका में पेट्रोल सस्ता होने के आसार नहीं, ऊर्जा मंत्री की चेतावनी

Sandesh Wahak Digital Desk: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हलचल तेज कर दी है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और जवाबी कार्रवाइयों के बीच कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा गया है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 6 फीसदी तक महंगा हो चुका है। इसका सीधा असर अमेरिका में ईंधन कीमतों पर पड़ता दिख रहा है।

अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने चेतावनी दी है कि अमेरिका में गैसोलीन की कीमतें अगले साल तक 3 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर बनी रह सकती हैं।

उन्होंने कहा कि मध्य-पूर्व में जारी संकट के कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने आर्थिक के साथ-साथ राजनीतिक चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं।

मध्यावधि चुनावों से पहले बढ़ी राजनीतिक चुनौती

ऊर्जा मंत्री के बयान के मुताबिक, ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल की कार्रवाइयों तथा क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण ईंधन कीमतों में इजाफा हुआ है।

Donald Trump

रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति नवंबर में होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले ट्रंप प्रशासन के लिए दबाव बढ़ा सकती है, जहां रिपब्लिकन पार्टी को सीनेट और प्रतिनिधि सभा में अपना बहुमत बचाना है।

पेट्रोल कीमतों को लेकर अलग-अलग अनुमान

CNN के ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ कार्यक्रम में क्रिस राइट ने कहा कि इस साल के अंत तक पेट्रोल 3 डॉलर प्रति गैलन से नीचे आ सकता है, लेकिन यह भी संभव है कि कीमतें अगले साल तक ऊंची बनी रहें।

इससे पहले अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने गर्मियों में कीमतों में गिरावट की संभावना जताई थी, जबकि ट्रंप खुद संकेत दे चुके हैं कि नवंबर तक ईंधन महंगा रह सकता है।

रिकॉर्ड स्तर के करीब कीमतें

आंकड़ों के मुताबिक, इस महीने की शुरुआत में अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 4.16 डॉलर प्रति गैलन के साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी, जो फिलहाल करीब 4.05 डॉलर पर बनी हुई है।

American Automobile Association (AAA) ने चेतावनी दी है कि ईरान संकट के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित होने से एयरलाइंस को जेट फ्यूल की संभावित कमी का सामना करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ईरान के साथ तनाव लंबा खिंचता है, तो इसका असर वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ेगा और अमेरिका भी इससे अछूता नहीं रहेगा।

विश्लेषकों के मुताबिक, युद्ध खत्म होने के बाद ही तेल और गैसोलीन की कीमतों में स्थिरता आने की उम्मीद की जा सकती है।

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