महाराष्ट्र के नए धर्मांतरण विरोधी कानून पर बवाल, कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट से की समीक्षा की मांग
Maharashtra News: कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज आलम ने महाराष्ट्र में ईसाई समुदाय से जुड़े मुद्दों को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि मुंबई के चर्चों में प्रार्थना के लिए आने वाले लोगों से अपनी इच्छा से चर्च आने का शपथपत्र भरवाया जाना गंभीर चिंता का विषय है। उनके मुताबिक, इससे ईसाई समुदाय में डर का माहौल होने का संकेत मिलता है।
शाहनवाज आलम ने दावा किया कि वसई, विरार, पालघर, नालासोपारा और भयंदर में पिछले छह महीनों के दौरान 11 चर्चों पर हमले हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया या कार्रवाई के बाद छोड़ दिया गया। कांग्रेस नेता ने इन घटनाओं पर न्यायपालिका की ओर से स्वतः संज्ञान नहीं लिए जाने पर भी सवाल उठाया।
धर्मांतरण कानून पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस नेता ने कहा कि महाराष्ट्र में 28 अगस्त से लागू होने वाले धर्मांतरण विरोधी कानून के कुछ प्रावधान मौलिक अधिकार, समानता और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक सिद्धांतों के खिलाफ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे ईसाइयों के खिलाफ हिंसा करने वाले तत्वों को अप्रत्यक्ष संरक्षण मिल सकता है।
सुप्रीम कोर्ट से समीक्षा की मांग
शाहनवाज आलम ने सुप्रीम कोर्ट से कानून की संवैधानिकता की समीक्षा करने की मांग की। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार से पिछले एक साल में चर्चों पर हुए हमलों और पुलिस कार्रवाई का विस्तृत श्वेतपत्र जारी करने को कहा। उन्होंने पूछा कि कितने आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और कितने मामलों में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई पूरी हुई।
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