मुशायरा राष्ट्रीय एकता के निर्माण में योगदान देता है: तारिक़ जिलानी
Barabanki News: मुशायरा व कवि सम्मेलन का आयोजन मूल रूप से हमारी गंगा जमुनी संस्कृति को बढ़ावा देता है मुशायरा राष्ट्रीय एकता की निर्माण में प्रमुख भूमिका निभाता है और इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन निरंतर होना चाहिए जिसमें समाज के दोनों वर्गों के लोग सम्मिलित हो और उर्दू ज़बान के प्रचार-प्रसार में भूमिका निभाएं।
वर्तमान समय में फखरुद्दीन अली अहमद मेमोरियल कमेटी उर्दू के प्रचार प्रसार एवं विकास का कार्य कर रही है कमेटी के अंतर्गत कवि सम्मेलन, मुशायरा, सेमिनार आदि का आयोजन किया जाता है यह बात मुशायरे की अध्यक्षता कर रहे तारिक़ जिलानी ने गांधी भवन देवां रोड बाराबंकी में रोशनी की तरफ सोसाइटी द्वारा आयोजित मुशायरे में कही। मुशायरा फखरुद्दीन अली अहमद सोसाइटी के वित्तीय सहयोग से आयोजित किया गया।

शॉल एवं मोमेंटो से स्वागत
मुशायरा के कोऑर्डिनेटर ज़ियाउल्लाह सिद्दीकी ने अतिथियों एवं कवियों का स्वागत किया और शॉल एवं मोमेंटो पेश किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा बाराबंकी के मिज़ाज में शेरो-शायरी रची बची है मुशायरा का संचालन प्रसिद्ध संचालक शाहबाज़ तालिब ने किया।

मुशायरे में कई शायरों ने हिस्सा लिया
इनमें प्रमुख शायरों में शोएब अनवर, फैज़ ख़ुमार बाराबंकवी, सग़ीर नूरी, शहबाज तालिब, अभीश्रेष्ठ तिवारी, जावेद समर, ज़ाहिद बाराबंकवी, इरशाद बाराबंकवी, श्वेता शुक्ला आदि ने अपना कलाम पेश किया।
सितम से रिश्ता ग़मो से अज़ीज़दारी है
वोह इसलिए की तबीयत में इंकिसारी है – शोएब अनवर
तेरे ख्याल को रहबर बना कर चलते हैं
इसीलिए तो सर अपना के चलते हैं
सब अपने-अपने चिरागों का खुद ख्याल रखें
हवा के क़ाफ़िले किसको बात कर चलते हैं – फ़ैज़ ख़ुमार बाराबंकवी
सदा ए वक़त हूं झुक कर सलाम मुझको
तुझे जगा दिया ऐ शहरे बेहिसी मैंने – सग़ीर नूरी

