UP में जन्म-मृत्यु पंजीकरण के नए नियम लागू, अब देरी पड़ सकती है भारी!
UP Birth and Death Certificates Rule: उत्तर प्रदेश में जन्म और मृत्यु पंजीकरण (Birth & Death Registration) की प्रक्रिया अब नए नियमों के तहत संचालित होगी। प्रदेश सरकार ने पंजीकरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, डिजिटल और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण नियमावली-2026 लागू कर दी है।
नई नियमावली के तहत जन्म, मृत्यु या मृत-जन्म की सूचना घटना के 21 दिनों के भीतर देना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे रिकॉर्ड अपडेट रखने और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही पंजीकरण और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को भी पहले की तुलना में आसान और पारदर्शी बनाया गया है।
अगर निर्धारित समय के भीतर सूचना नहीं दी जाती है तो विलंब शुल्क देना होगा। देरी की अवधि के आधार पर शुल्क और अनुमति की प्रक्रिया भी तय की गई है।
देरी से पंजीकरण कराने पर कितना लगेगा शुल्क?
- 21 दिन के बाद लेकिन 30 दिन के भीतर पंजीकरण: 20 रुपये विलंब शुल्क।
- 30 दिन से 1 वर्ष तक की देरी: संबंधित अधिकारी की अनुमति के साथ 50 रुपये शुल्क।
- 1 वर्ष से अधिक की देरी: एसडीएम, जिलाधिकारी या अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश पर 100 रुपये शुल्क देकर पंजीकरण कराया जा सकेगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जन्म प्रमाणपत्र में किसी भी प्रकार के संक्षिप्त नाम (Short Name) स्वीकार नहीं किए जाएंगे। इसके अलावा जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने के लिए 50 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है।
क्यों जरूरी हैं Birth and Death Certificates?
जन्म प्रमाणपत्र (Birth Certificate) और मृत्यु प्रमाणपत्र (Death Certificate) सिर्फ सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि कई कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का आधार होते हैं।
जन्म प्रमाणपत्र की जरूरत:
- स्कूल और कॉलेज में प्रवेश
- पासपोर्ट और अन्य पहचान पत्र बनवाने में
- सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में
- उम्र और नागरिकता के प्रमाण के रूप में
मृत्यु प्रमाणपत्र की जरूरत:
- बीमा (Insurance) क्लेम के लिए
- पेंशन और पारिवारिक लाभ प्राप्त करने में
- संपत्ति के हस्तांतरण से जुड़ी प्रक्रियाओं में
- कानूनी रूप से मृत्यु का प्रमाण प्रस्तुत करने में
नई नियमावली में ऑनलाइन पंजीकरण, रिकॉर्ड के सुरक्षित संरक्षण और प्रमाणपत्रों में त्रुटि सुधार की प्रक्रिया को भी अधिक व्यवस्थित किया गया है। ऐसे में नागरिकों को सलाह दी गई है कि जन्म या मृत्यु की स्थिति में तय समय सीमा के भीतर पंजीकरण जरूर कराएं, ताकि बाद में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
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