‘एक कचौड़ी एक समोसा, अब गैस पर न रहा भरोसा’, गैस संकट पर अखिलेश यादव का नया नारा
Sandesh Wahak Digital Desk: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को प्रदेश मुख्यालय में मीडिया को संबोधित करते हुए ईंधन संकट, आरक्षण और सरकारी दावों पर भाजपा सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में एलपीजी की किल्लत को लेकर सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाते हुए इसे ‘लापता गैस’ करार दिया।
‘गैस पर न रहा भरोसा, कोयले पर बनाओ रोटियां’
अखिलेश यादव ने गैस एजेंसियों और पेट्रोल पंपों पर लगी लंबी लाइनों पर कटाक्ष करते हुए कहा “भाजपा ने जनता को लाइनों में लगाने के अलावा कुछ नहीं किया। यूपी में अब एलपीजी का मतलब ‘लापता गैस’ हो गया है।” उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, “एक कचौड़ी एक समोसा, अब गैस पर न रहा भरोसा।” उन्होंने आगे कहा कि लोग अब लकड़ी और कोयले के चूल्हे पर लौटने को मजबूर हैं, शायद भाजपा चाहती है कि लोग ‘स्मोक्ड फूड’ ही खाएं। उन्होंने मुख्यमंत्री के ‘किल्लत नहीं है’ वाले बयान पर कहा कि जनता उनकी बातों में न आए, यह उनकी “चलाचली की बेला” (जाने का समय) है।
बड़े चुनावी वादे: स्त्री सम्मान और सम्राट अशोक की प्रतिमा
2027 के चुनाव की आहट के बीच अखिलेश यादव ने मास्टरस्ट्रोक चलते हुए बड़े ऐलान किए।
स्त्री सम्मान समृद्धि योजना: सपा की सरकार बनने पर प्रदेश की हर महिला को सालाना ₹40,000 की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
सम्राट अशोक का सम्मान: गोमती रिवर फ्रंट पर सम्राट अशोक की भव्य प्रतिमा लगाकर उन्हें सोने के सिंहासन पर प्रतिष्ठित किया जाएगा।
जातिगत जनगणना: उन्होंने मांग की कि सभी जातियों की गिनती हो और उसी अनुपात में आरक्षण दिया जाए।
MoU घोटाला और प्रोपेगेंडा मंत्री
सरकारी निवेश के दावों पर हमला करते हुए सपा प्रमुख ने सभी MoU की जांच की मांग करते हुए कहा कि निवेश करने वाली कंपनियों का कोई वित्तीय आधार नहीं है। “हिटलर के राज में एक प्रोपेगेंडा मंत्री था, लेकिन यहाँ तो केंद्र और प्रदेश के सभी मंत्री ‘प्रोपेगेंडा मिनिस्टर’ बन गए हैं।” अखिलेश ने कहा कि भाजपा ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के बढ़ते प्रभाव से डरी हुई है।
विदेश नीति और डिप्लोमेसी
मध्य पूर्व (ईरान-इजरायल-अमेरिका) के बीच चल रहे तनाव पर अखिलेश यादव ने कहा कि भारत ने ‘विश्वगुरु’ बनने का बड़ा मौका खो दिया है। व्यापार के साथ मजबूत डिप्लोमेसी चलनी चाहिए थी, जिसमें सरकार विफल रही है।
Also Read: मिडिल ईस्ट संकट का असर! निजी कंपनियों ने बदली रेट लिस्ट, पेट्रोल-डीजल हुआ इतना महंगा

