SGPGI: अंगदान से ‘महादान’ तक, ब्रेन डेड डोनर से अंग निकालने की जटिल प्रक्रिया पर विशेष मंथन
लिवर ट्रांसप्लांट टीम की बड़ी पहल, केजीएमयू और पीजीआई के समन्वय की सराहना, निदेशक प्रो. आर.के. धीमन बोले- टीमवर्क से ही संभव है जीवन बचाना
Sandesh Wahak Digital Desk: राजधानी लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने बुधवार को ‘ब्रेन डेड डोनर’ से मल्टीऑर्गन हार्वेस्ट (अंग निकालने) की जटिल और बहु-विषयक प्रक्रिया को समझने और सराहने के लिए एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान विशेषज्ञों ने जोर दिया कि एक सजग अंगदान कई जिंदगियों को नया जीवन दे सकता है।
भावुक कर देने वाली प्रस्तुति और सम्मान
कार्यक्रम की शुरुआत लिवर ट्रांसप्लांट प्रभारी प्रो. सुप्रिया शर्मा के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने बताया कि 24X7 ट्रांसप्लांट सेवाएं केवल मशीनों से नहीं, बल्कि एक समर्पित टीमवर्क से चलती हैं। नर्सिंग और ओटी स्टाफ ने अंग पुनर्प्राप्ति प्रक्रिया पर आधारित एक लघु नाटिका और संगीतमय प्रस्तुति दी, जिसने अंगदान के भावनात्मक और तकनीकी पहलुओं को जीवंत कर दिया। सफल अंग पुनर्प्राप्ति और प्रत्यारोपण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले चिकित्सकों, तकनीशियनों और ट्रांसप्लांट समन्वयकों को सम्मानित किया गया।
संस्थानों के बीच सहयोग की मिसाल
कार्यक्रम में मुख्य रूप से मौजूद केजीएमयू के प्रो. अभिजीत चंद्रा ने एसजीपीजीआई की सराहना की। उन्होंने कहा कि पीजीआई द्वारा केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर से लिवर रिट्रीवल (अंग प्राप्त करना) कर जरूरतमंद मरीज तक पहुंचाना चिकित्सा जगत में आपसी सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है।
विशेषज्ञों का विजन: “जमीनी स्तर पर हो सुधार”
निदेशक प्रो. आर. के. धीमन ने पूरी लिवर ट्रांसप्लांट टीम को बधाई देते हुए कहा कि समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाना और समन्वित प्रयास करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
डीन प्रो. शालीन कुमार ने कहा कि इस प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए हमें जमीनी स्तर पर SWOT विश्लेषण (शक्तियों और कमियों का आकलन) करने की जरूरत है।
उत्तर प्रदेश में मृतक अंगदान (Cadaver Organ Donation) को बढ़ावा देने और प्रत्यारोपण सेवाओं को सुदृढ़ करने के संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
Also Read: ‘PDA का नाम सुनकर थर-थर कांपने लगी है भाजपा’, CM योगी के बयान पर अखिलेश यादव का पलटवार



