Siddharthnagar News: ‘निपुण सम्मान समारोह’ में गूंजा गुरुओं का सम्मान, 533 विद्यालयों को मिला प्रमाण पत्र
Siddharthnagar News: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद स्थित लोहिया कला भवन में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा “निपुण सम्मान समारोह” का भव्य आयोजन किया गया। इस गौरवशाली क्षण में जनपद के 533 विद्यालयों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए निपुण सम्मान प्रमाण पत्र से नवाजा गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने शिक्षकों के समर्पण की सराहना करते हुए उन्हें राष्ट्र और समाज का असली निर्माता बताया।

ईश्वर के बाद गुरु का स्थान सर्वोपरि: ध्रुव कुमार त्रिपाठी
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षक ही वह धुरी है जिस पर राष्ट्र का भविष्य टिका है। उन्होंने “संदेश वाहक” से खास बातचीत में कहा “जमीन पर ईश्वर के बाद कोई सम्मान के लायक है तो वह गुरु है। गुरु ही अबोध को ज्ञानी बनाकर उसे ईश्वर और अल्लाह की महिमा समझने योग्य बनाता है। आज के शिक्षक योग्यताधारी हैं और उन्हें अपनी इस योग्यता का पूर्ण उपयोग बच्चों की प्रतिभा निखारने में करना चाहिए।”
आकांक्षी जनपद की शिक्षा सुधारना शिक्षकों का दायित्व: सीडीओ
मुख्य विकास अधिकारी (CDO) बलराम सिंह ने शिक्षकों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराते हुए कहा कि सिद्धार्थनगर एक आकांक्षी जनपद है और यहाँ शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाना शिक्षकों का प्राथमिक लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में व्यवस्थाएं बहुत अच्छी हुई हैं, बस शिक्षकों को अपने परिश्रम से इसे साबित करना है।

सांसद और विधायक ने दी शुभकामनाएं
सदर विधायक श्यामधनी राही और सांसद प्रतिनिधि एसपी अग्रवाल ने भी गुरुओं के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि एक मजबूत राष्ट्र के निर्माण के लिए गुरु ही बच्चों को अच्छाइयों की मिसाल बनाता है। उन्होंने सम्मानित होने वाले शिक्षकों को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

निपुण रणनीति और उपलब्धियां
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) शैलेश कुमार ने बताया कि जिले के 533 विद्यालयों ने निपुण लक्ष्य प्राप्त कर यह उपलब्धि हासिल की है।
रणनीति: SRG अंशुमन सिंह ने निपुण विद्यालय बनने की रणनीतियों पर प्रकाश डाला।
प्री-प्राइमरी: अपूर्व श्रीवास्तव ने प्री-प्राइमरी और कक्षा एक के बच्चों को विद्यालय के प्रति सहज बनाने में शिक्षकों की भूमिका को स्पष्ट किया।
“मेहनत का फल मीठा होता है” – खुश दिखीं महिला शिक्षिकाएं
समारोह में बड़ी संख्या में महिला शिक्षिकाओं को सम्मानित किया गया। प्रशस्ति पत्र पाकर उत्साहित शिक्षिकाओं ने “संदेश वाहक” से अपनी खुशी साझा की। उन्होंने कहा कि “मेहनत का फल हमेशा मीठा और सम्मानित होता है। हमने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन किया और आज यह सम्मान हमारे कार्य के प्रति समर्पण की जीत है।”
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