ट्रम्प प्रशासन ने भारत पर लगाया 10% का कम टैरिफ, फोर्स लेबर नियमों पर मिली राहत

Sandesh Wahak Digital Desk: अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने सेक्शन 301 के तहत एक अहम व्यापारिक घोषणा करते हुए भारत पर 10 प्रतिशत का अपेक्षाकृत कम सीमा शुल्क (टैरिफ) लागू किया है। यह फैसला यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) द्वारा 60 प्रमुख देशों पर की गई व्यापक जांच के बाद आया है। अमेरिका ने माना है कि भारत ने जबरन श्रम (Force Labor) से बने सामानों के आयात पर समय रहते प्रभावी प्रतिबंधात्मक नीतियां लागू की हैं, जिसके चलते उसे अनुकूल श्रेणी में जगह मिली है। यह नई दरें 24 जुलाई से लागू होंगी।

भारत समेत 17 देशों को कम टैरिफ श्रेणी में जगह

जांच के घेरे में आई 60 अर्थव्यवस्थाओं में से 17 देशों पर केवल 10% का न्यूनतम अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। भारत के अलावा इस राहत पाने वाली सूची में कनाडा, मेक्सिको, ब्रिटेन, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देश शामिल हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने स्पष्ट किया कि जून में प्रस्तावित कार्रवाई की घोषणा के बाद भारत ने फोर्स लेबर पर त्वरित नीतिगत कदम उठाए, जिसका सीधा लाभ उसे मिला है।

चीन, वियतनाम और सऊदी अरब पर लगा 12.5% भारी शुल्क

दूसरी तरफ, जिन देशों ने फोर्स लेबर रोकने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए या विफलता दिखाई, उन पर 12.5% का अधिक टैरिफ थोपा गया है। इस श्रेणी में चीन, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, सऊदी अरब, वियतनाम, यूएई और दक्षिण अफ्रीका जैसे बड़े देश शामिल हैं। यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान के लिए उनकी मौजूदा एमएफएन (MFN) दरों को समायोजित करके अलग टैरिफ व्यवस्था बनाई गई है।

दवाओं और सेमीकंडक्टर को कार्रवाई से छूट

अमेरिकी बाजार में आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए यूएसटीआर ने कुछ आवश्यक वस्तुओं को इस अतिरिक्त टैरिफ से छूट दी है। इनमें महत्वपूर्ण कच्चा माल, जीवनरक्षक दवाएं, सेमीकंडक्टर निर्माण के उपकरण और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला के लिए आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं।

राष्ट्रपति ट्रम्प का कहना है कि दशकों से चली आ रही अपीलों के बावजूद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जबरन श्रम समाप्त नहीं हुआ है। अमेरिका का उद्देश्य मानवाधिकारों के उल्लंघन को रोकना और वैश्विक व्यापार में निष्पक्षता लाना है। सेक्शन 301 का इस्तेमाल पहले मुख्य रूप से चीन से जुड़े व्यापारिक विवादों में होता था, लेकिन ट्रम्प प्रशासन ने अब इसका दायरा अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों के अनुपालन तक बढ़ा दिया है।

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