यूपी का ‘दिव्यास्त्र’ उड़ाएगा दुश्मनों के होश, सीएम योगी के विजन से लखनऊ के स्टार्टअप ‘हॉवरिट’ ने रचा इतिहास
Sandesh Wahak Digital Desk: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश अपनी पुरानी छवि को पीछे छोड़कर रक्षा तकनीक (Defense Tech) के नए युग में प्रवेश कर चुका है। कभी अवैध तमंचों के लिए चर्चा में रहने वाला यूपी अब अत्याधुनिक ड्रोन्स और यूएवी (UAV) का निर्माण केंद्र बन गया है। इसकी सबसे बड़ी मिसाल राजधानी लखनऊ के स्टार्टअप ‘हॉवरिट’ (Hoverit) ने पेश की है, जिसने भारतीय सेना की जरूरतों के लिए “दिव्यास्त्र एमके-1” जैसा घातक ड्रोन तैयार किया है।
‘दिव्यास्त्र MK-1’: निगरानी और हमला, दोनों में बेजोड़
तीन युवा उद्यमियों— पवन, रविंद्र पाल सिंह और सौरभ सिंह द्वारा विकसित यह ड्रोन आधुनिक युद्ध की परिभाषा बदलने का दम रखता है। इसकी खासियतें इसे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाती हैं।
यह ड्रोन 500 किलोमीटर की रेंज तक उड़ान भर सकता है। करीब 15 किलोग्राम तक पेलोड (हथियार/बम) ले जाने में सक्षम यह ड्रोन एआई (AI) आधारित टारगेटिंग सिस्टम से लैस है। यह 10,000 फीट की ऊंचाई पर लगातार 5 घंटे तक मंडरा सकता है। विदेशी ड्रोन्स के मुकाबले इसकी लागत काफी कम है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती देता है।
डिफेंस कॉरिडोर में लगेगी ‘एमके-2’ की यूनिट
स्टार्टअप की सफलता यहीं नहीं रुकती। कंपनी अब “एमके-2” वर्जन पर काम कर रही है, जिसकी क्षमताएं और भी हैरान करने वाली हैं।
2000 KM रेंज: नए वर्जन की रेंज 2000 किलोमीटर और पेलोड क्षमता 80 किलोग्राम तक होगी।
मासिक उत्पादन: यूपी डिफेंस कॉरिडोर में इसकी नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाई जा रही है, जहाँ हर महीने 20 ड्रोन बनाने का लक्ष्य है।
ड्रोन की पूरी फौज तैयार
कंपनी ने सेना के लिए अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से ड्रोन की पूरी सीरीज विकसित की है।
- आंख: सर्विलांस और निगरानी के लिए।
- बाज: 20 किलो वजन ढोने वाला सप्लाई ड्रोन।
- VTOL यूएवी: जो बिना रनवे के सीधे उड़ान भर सकते हैं।
- डिकॉय ड्रोन: दुश्मन के रडार को भ्रमित करने के लिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों और डिफेंस कॉरिडोर की सुविधा के कारण आज यूपी के युवा न सिर्फ उद्यमी बन रहे हैं, बल्कि देश की सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए ‘स्वदेशी दिव्यास्त्र’ भी बना रहे हैं।
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