UP News: रिटायर होने पर बड़े बिल्डरों की कंपनियों में चमकती है एलडीए अफसरों की ‘प्रतिभा’
Sandesh Wahak Digital Desk/Manish Srivastava: यूपी में पिछले एक दशक में पौने दो लाख अवैध निर्माणों की इबारत कई शहरों में लिखी गयी है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद एलडीए की नींद टूटी और 83 अवैध अपार्टमेंट को ध्वस्त करने की मुहिम शुरू की जा रही है।

अवैध निर्माणों को शह देकर करोड़ों की मिलकियत एलडीए अफसरों-इंजीनियरों ने खड़ी की है। इनमें एलडीए के कई पूर्व वीसी समेत प्रमुख पदों पर बैठे अफसर भी शामिल हैं। बीते दो दशकों के दौरान लखनऊ में अवैध निर्माणों की फसल खूब लहलहाई है। एलडीए के अफसर अपनों के अवैध निर्माणों पर भी खासे मेहरबान हैं। यही अफसर पहले बड़े बिल्डरों को करोड़ों का लाभ पहुंचाते हैं। फिर इन्ही बिल्डरों की नामी कंपनियों में मोटे पैकेज पर नौकरियां भी करने से परहेज नहीं करते। इसीलिए हजारों अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण आदेशों पर अमल नहीं होता।

बीबी सिंह की सम्पत्तियों की फेहरिस्त बेहद लम्बी
पहला नाम एलडीए के पूर्व वीसी बीबी सिंह का है। जिनके कार्यकाल के दौरान एलडीए में कई घोटालों और बिल्डरों पर दरियादिली की कलंक कथा लिखी गयी। इन घोटालों के जरिये बीबी सिंह की सम्पत्तियों की फेहरिस्त बेहद लम्बी बतायी जा रही है। इसके बाद पूर्व वीसी बीबी सिंह ने अंसल एपीआई में शीर्ष पद पर लाखों रूपए प्रतिमाह की नौकरी भी की। इस दौरान अंसल के घोटालों का परवान चढ़ना भले सुखिऱ्यों में रहा, लेकिन एलडीए ने कार्रवाई नहीं की।

अगला नंबर एलडीए के पूर्व सचिव राम विलास यादव का है। जिनका कुर्सी रोड पर करोड़ों का अवैध काम्प्लेक्स है। जिसे एलडीए ने पहले सील किया था। बाद में राहत पहुंचा दी। इसको भी एलडीए अफसरों ने अभी तक नेस्तनाबूद करने पर गंभीर रुख नहीं अख्तियार किया है। यादव के लखनऊ में ऐसे कई निर्माण हो सकते हैं।

इसी तरह एलडीए के पूर्व वीसी सत्येंद्र सिंह यादव ने 2015 में सुल्तानपुर रोड पर ओमेक्स टाउनशिप के अंदर पत्नी की सोसाइटी के नाम से कई एकड़ जमीन खरीद कर 186 फ्लैट का नक्शा पास करा लिया था। भाजपा सरकार आने के बाद नक्शा निरस्त कर दिया गया। शासन व एलडीए कोई कार्यवाही नहीं कर पाया। भू-उपयोग आवासीय करने से ही उन्हें करोड़ों का फायदा हुआ।

सत्येंद्र ने बिल्डरों से साठगांठ करके हजारों घटिया फ़्लैट बिना डिमांड ही बनवा दिये थे। एलडीए के इस पूर्व वीसी के पास भी कई सम्पत्तियां हैं। भूमाफिया दिलीप बाफिला को सत्येंद्र ने खेल करके गोमती नगर विस्तार में अरबों की जमीन दी थी। सत्येंद्र के खिलाफ आज तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई अंजाम नहीं दी गई।
सीएम को विधायक का पत्र : फाइलों में सील का दिखावा, हकीकत में अवैध इमारत तैयार
सील होने के बावजूद अवैध इमारतों में काम खूब जोर-शोर से चलता है। तभी सीलिंग के बावजूद भवन 10 दिन में तैयार हो रहा है। मोहनलालगंज के विधायक ने अवैध निर्माण को रुकवाने के लिए अफसरों को पत्र लिखा था। अब उन्होंने सीएम योगी को पत्र भेज कर इस मामले में कठोर कार्रवाई किए जाने का अनुरोध किया है। एलडीए वीसी रहे पीएन सिंह के कार्यकाल में निराला नगर फ्लाईओवर शुरू होते ही बहुमंजिला इमारत सील हुई। बाद में बिल्डर ने सील रहते ही इसे पूरा कर लिया। इम्प्रूवमेन्ट ट्रस्ट और नजूल की जमीनों पर खूब अवैध निर्माण हुए हैं।
अवैध निर्माणों का पूरा सिंडिकेट, पेशकारों-विहित प्राधिकारियों की संपत्ति की जांच बेहद जरूरी
एलडीए में अवैध निर्माणों का पूरा सिंडिकेट है। जिसमें प्रवर्तन कोर्ट के पेशकार भी शामिल हैं। कई पेशकार वर्षों से प्रवर्तन कोर्ट का हिस्सा हैं। आरोपों के मुताबिक चार वर्ष तक एलडीए के पूर्व सचिव रहे अफसर के कार्यकाल में खास जाति के पेशकारों की तैनाती प्रवर्तन कोर्ट में इसी मकसद से की गयी। पेशकारों की सम्पत्तियों की जांच जरुरी है। कोर्ट की जिम्मेदारी बांटने में भी नियमों का मखौल बनता है। कई पूर्व विहित प्राधिकारियों की आर्थिक हैसियत भी चमकी है।
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