‘हैलो…गोरखपुर मठ से बोल रहा हूं’, CM योगी का नाम लेकर अधिकारियों पर रौब झाड़ते थे शातिर, ऐसे हुआ खुलासा
Sandesh Wahak Digital Desk: संभल पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम का दुरुपयोग कर अधिकारियों पर दबाव डालता था। गिरोह के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, जो कथित तौर पर अधिकारियों को फोन करके मुख्यमंत्री के नाम पर काम करने के लिए कहते थे।
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य मुख्यमंत्री कार्यालय की नकली मुहर और हस्ताक्षर का उपयोग करके शिकायत पत्र भेजते थे।गिरफ्तार किए गए इन आरोपियों के द्वारा शिकायतकर्ताओं से शिकायती पत्र लेकर CM कार्यालय की फर्जी मोहर लगाई जाती थी और फिर संबंधित जिले के अफसरों को भेजकर कहा जाता था कि… ‘हैलो मैं गोरखपुर मठ से बोल रहा हूं, आपको माननीय मुख्यमंत्री के जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान आई हुई शिकायत को प्रेषित किया गया है, आप इस प्रार्थना पत्र के पक्ष में कार्य करें, ये महाराज जी का आदेश है।’ गिरोह के सदस्य काम करवाने के एवज में प्रति व्यक्ति 20,000 से 50,000 रुपये तक वसूलते थे। हाल ही में, उन्होंने 33 राजस्व अधिकारियों और 36 पुलिस अधिकारियों को 135 बार फोन किया था।
गिरफ्तार किए गए इन आरोपियों के द्वारा शिकायतकर्ताओं से शिकायती पत्र लेकर CM कार्यालय की फर्जी मोहर लगाई जाती थी और फिर संबंधित जिले के अफसरों को भेजकर कहा जाता था कि… ‘हैलो मैं गोरखपुर मठ से बोल रहा हूं, आपको माननीय मुख्यमंत्री के जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान आई हुई शिकायत को प्रेषित किया गया है, आप इस प्रार्थना पत्र के पक्ष में कार्य करें, ये महाराज जी का आदेश है।’
ऐसे हुआ खुलासा
यह मामला तब सामने आया जब संभल के एक व्यवसायी विपुल गुप्ता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उन्हें “पंडित राज आचार्य महादेव” नाम के एक व्यक्ति से लगातार फोन आ रहे हैं, जो काम करवाने के लिए उन पर दबाव डाल रहे हैं। पुलिस ने जांच शुरू की और पाया कि गोरखपुर मठ या भाजपा में “पंडित राज आचार्य महाराज” नाम का कोई व्यक्ति नहीं है। फोन नंबर की डिटेल निकालने के बाद, पुलिस ने बाराबंकी जिले के नागेंद्र और सुधीर मिश्रा और रामपुर जिले के राजू को गिरफ्तार किया।
पूछताछ के दौरान, आरोपियों ने अपना अपराध कबूल कर लिया। उन्होंने बताया कि नागेंद्र खुद को “पंडित राज आचार्य महाराज” बताकर अधिकारियों को फोन करता था, जबकि सुधीर मिश्रा नकली मुहर और हस्ताक्षर का उपयोग करके दस्तावेज तैयार करता था। राजू लोगों से मामले लाता था।
संभल के पुलिस अधीक्षक ने कहा कि गिरोह के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि इस गिरोह से संभल के एक व्यक्ति कपिल सिंघल ने संपर्क किया था। कपिल सिंघल अपने भाई के साथ प्रॉपर्टी विवाद में उलझा हुआ था और विपुल गुप्ता की जमीन हड़पना चाहता था। गिरोह ने विपुल गुप्ता और उनकी पत्नी को फोन करके धमकाया था। पुलिस के अनुसार, गिरोह ने फोन करने के लिए 30,000 रुपये एडवांस लिए थे और बाकी पैसे काम होने के बाद मिलने थे।
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