भाजपा ने रोका महमूदाबाद की संपत्ति का हस्तांतरण, अली खान की गिरफ्तारी पर छिड़ी बहस
नई दिल्ली: ब्लूक्राफ्ट डिजिटल फाउंडेशन के सीईओ अखिलेश मिश्रा ने महमूदाबाद एस्टेट की विरासत को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। उन्होंने खुलासा किया कि किस तरह 2017 में भाजपा सरकार ने एक बड़े हस्तक्षेप के जरिए अली खान महमूदाबाद के परिवार को उनकी पुश्तैनी संपत्ति को हासिल करने से रोक दिया था। अली खान हाल ही में एक विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर गिरफ्तार हुए हैं। वह अशोका यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं।
अखिलेश मिश्रा ने दिवंगत वित्त मंत्री अरुण जेटली के उस पुराने तर्क का हवाला देते हुए कहा कि 1968 के ‘शत्रु संपत्ति अधिनियम’ के तहत राजा महमूदाबाद की संपत्तियां भारत में जब्त कर ली गई थीं। लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने गलती से यह फैसला सुनाया कि राजा का बेटा जो भारत में रह रहा था उस संपत्ति को विरासत में ले सकता है, जबकि राजा खुद पाकिस्तान के नागरिक थे।
उन्होंने बताया कि इस फैसले को पलटने की कोशिश तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने एक अध्यादेश के ज़रिए की थी, लेकिन यूपीए सरकार की वोट बैंक की राजनीति के कारण वह अध्यादेश कभी कानून नहीं बन सका। बाद में 2017 में भाजपा सरकार ने एक नया कानून पास कर यह साफ कर दिया कि राजा महमूदाबाद के परिवार को संपत्ति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा, अंतिम प्रभाव यह रहा कि भाजपा सरकार की वजह से महमूदाबाद परिवार को वह विशाल संपत्ति नहीं मिल सकी, जिसे राजा महमूदाबाद ने जिन्ना और पाकिस्तान की विचारधारा को समर्थन देने के लिए इस्तेमाल किया था।
गौरतलब है कि यह टिप्पणी उस समय आई है जब अली खान महमूदाबाद को ऑपरेशन सिंदूर के बाद एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर गिरफ्तार किया गया है। उनके खिलाफ भारत की संप्रभुता और एकता को खतरे में डालने जैसे गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई है। मिश्रा ने अली खान की पोस्ट पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह पोस्ट पाकिस्तान की भाषा बोल रही थी और “सोची-समझी साजिश के तहत हिन्दू-मुस्लिम तनाव को उभारने” का प्रयास था, वो भी ऐसे समय जब भारत और पाकिस्तान के बीच हालात तनावपूर्ण थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अली खान की पोस्ट में इस्तेमाल की गई भाषा पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर के बयान से मेल खा रही थी।
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