ईद-उल-अजहा की धूम: मस्जिदों में अदा की जा रही नमाज, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

 

 

Sandesh Wahak Digital Desk: आज देशभर में ईद-उल-अजहा का पावन पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोग बड़ी संख्या में मस्जिदों और ईदगाहों में एकत्र होकर विशेष नमाज अदा कर रहे हैं। इस पर्व पर पैगंबर हजरत इब्राहीम (अलै.) की अल्लाह के प्रति समर्पण भावना और उनकी ऐतिहासिक कुर्बानी की याद ताजा की जाती है।

लखनऊ सहित प्रदेश के कई जिलों में सुबह से ही नमाज पढ़ने का सिलसिला जारी है। राजधानी लखनऊ में ऐशबाग ईदगाह, टीले वाली मस्जिद और आसिफी मस्जिद जैसे प्रमुख स्थानों पर बड़ी जमातें हुईं। ऐशबाग ईदगाह में मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने सुबह 10 बजे नमाज अदा कराई, वहीं शिया समुदाय की प्रमुख नमाज आसिफी मस्जिद में मौलाना सरताज हैदर की अगुवाई में सुबह 11 बजे पढ़ी गई। टीले वाली मस्जिद में मौलाना फजलुल मन्नान रहमानी ने 9 बजे नमाज कराई।

ईद की नमाज के बाद कुर्बानी की रस्म शुरू हो जाती है, जो तीन दिनों तक चलती है। लोग इस मौके पर अल्लाह की राह में जानवर की कुर्बानी देकर अपने समर्पण को व्यक्त करते हैं।

प्रशासन पूरी तरह सतर्क

सुरक्षा को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। राज्य भर में करीब 94 ईदगाहों और 1200 से अधिक मस्जिदों की निगरानी ड्रोन कैमरों की मदद से की जा रही है। पुलिस बलों की तैनाती के साथ शहरों को सुरक्षा के लिहाज से अलग-अलग ज़ोन और सेक्टरों में बाँटा गया है। लखनऊ के पुराने इलाकों में संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था बबलू कुमार ने डीसीपी पश्चिम विश्वजीत श्रीवास्तव के साथ रूट मार्च कर हालात का जायज़ा लिया।

मस्जिद सुव्हानिया के इमाम कारी मोहम्मद सिद्दीक ने बताया कि ईद-उल-अजहा का मूल संदेश अल्लाह की राह में बलिदान देने की भावना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जो लोग सामर्थ्य में होते हुए भी कुर्बानी नहीं करते, उन्हें इस पर्व की आत्मा को समझना चाहिए।

ईद-उल-अजहा न केवल एक धार्मिक रस्म है, बल्कि यह समाज में समर्पण, त्याग और आपसी भाईचारे का संदेश भी देती है।

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