Shravasti News: गर्भवती महिलाओं व बच्चों की नहीं, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की सुधर रही सेहत

पात्रों तक नहीं पहुंच रहा पौष्टिक आहार, वीडियो वायरल होने पर मचा हड़कंप

Sandesh Wahak Digital Desk/Mata Prasad Verma: महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा श्रावस्ती जनपद के आंगनबाड़ी केन्द्रों को उपलब्ध कराई जा रही सामग्री किस तरह कालाबाजारी की भेंट चढ़ रही है, इसका अंदाजा जिले में एक के बाद एक वायरल हो रहे वीडियो से लगाया जा सकता है। जो यह बताने के लिए पर्याप्त है कि सरकार द्वारा गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को दी जाने वाली पोषण सामग्री से गर्भवती महिलाओं व बच्चों की नहीं बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों सहित विभागीय लोगों कि सेहत सुधर रही है।

चना दाल के पैकेट की हो रही कालाबाजारी

नौ जुलाई को विकास खण्ड इकौना परिसर से एक ई-रिक्शा के सीट के नीचे से आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों को मिलने वाला 230 पैकेट सोयाबीन तेल बरामद हुआ था। वहीं विकास खण्ड हरिहरपुररानी के ग्राम पंचायत लक्ष्मनपुर कोठी में एक आंगनबाड़ी कार्यकत्री के पुत्र के पास से स्थानीय ग्रामीणों ने देर रात चना दाल के पैकेट बरामद किए थे, जिसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि चना दाल का यह पैकेट आंगनबाड़ी कार्यकत्री के पुत्र द्वारा कालाबाजारी के लिए ले जाया जा रहा था। जिसके बाद गांव की महिलाओं ने दस जुलाई को आंगनबाड़ी केन्द्र पर पहुंच कर विरोध प्रदर्शन करते हुए सरकार द्वारा दी जा रही अपने हक की पोषण सामग्री की मांग की थी।

जिम्मेदार अधिकारी नहीं कर रहे कार्रवाई

बावजूद इसके महिलाओं की आवाज को किसी भी जिम्मेदार अधिकारी द्वारा नहीं सुना गया। गौरतलब है कि सरकार द्वारा गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को चना दाल 1 किलो, गेहूं दलिया 1.5 किलो, सोयाबीन तेल 455 ग्राम दिया जाता है। सात माह से तीन साल तक के बच्चों को चना दाल 1 किलो, दलिया 1 किलो, सोयाबीन तेल 455 ग्राम दिया जाता है। तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को चना दाल आधा किलो, दलिया आधा किलो प्रति यूनिट की दर से प्रति माह दिया जाता है।

इसके अलावा सरकार आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पूरक पोषण प्रदान करती है। जिसमें खड़े अनाज से लेकर ड्राई फ्रूट तक होते हैं। जबकि आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों को नाश्ता और दोपहर का भोजन भी दिया जाता है। कुछ ग्राम पंचायतें बच्चों के लिए पूरक पोषण के तौर पर दूध, अंडे और केले भी उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चों को खेलने कूदने के लिए विभिन्न प्रकार के खिलौने भी उपलब्ध कराए जाते हैं मगर इन सबका जमीनी हकीकत से कुछ लेना-देना नहीं है।

कराएंगे जांच: सीडीओ

सीडीओ श्रावस्ती शाहिद अहमद का कहना है कि ई-रिक्शा से बरामद सोयाबीन तेल के प्रकरण में थाना इकौना में मुकदमा पंजीकृत करा दिया गया है। शेष मामलों का जांच करवा कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी।

ऐसे होती है कालाबाजारी

सूत्रों की मानें तो दलिया को पशु पालकों के हाथों बेचा जाता है और चने के दाल और सोयाबीन तेल को किराना दुकानदारों को बेचा जाता है। नाम न छापने की शर्त पर एक व्यक्ति ने बताया कि पशुपालकों को दलिया 25 रूपये प्रति किलो तथा किराना दुकानदारों को तेल 35 रुपये पैकेट और चने का दाल 30 रूपये पैकेट की दर से बेचा जाता है। कुछ आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां अब तेल के पैकेट को खोलकर उसे टीन में भरकर और चने के दाल का पैकेट खोलकर उसे बोरे में भरकर दुकानदारों तक पहुंचाती हैं। वहीं कुछ लोग लग्जरी गाडिय़ों में भरकर रात के अंधेरे में उसको ठिकाने तक पहुंचाते हैं जबकि कुछ विकास खण्ड में गोदाम प्रभारी की मिलीभगत से उनके चहेते दुकानदारों को बेचा जाता है।

साहब, बच्चा पांच साल का होने को है पर अभी तक कुछ नहीं मिला

आंगनबाड़ी में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहराई तक पहुंच पाना व दोषी कार्यकत्रियों को दण्डित कर पाना जिले के संबंधित अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। इस भ्रष्टाचार के कुछ ही मामले प्रकाश में आ पाते हैं। विकास खण्ड इकौना के ग्राम पंचायत कटरा में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्र तथा उसकी कार्यकत्रियों का खेल और भी निराला है। कटरा गांव की महिलाओं का आरोप है कि उनके गर्भावस्था से लेकर बच्चों के पांच वर्ष की उम्र होने तक (अबतक) आंगनबाड़ी कार्यकत्री द्वार पौष्टिक आहार सहित कोई भी सामग्री नहीं दी गई।

कुछ महिलाओं का आरोप है कि वे पोषण सामग्री मांगने आंगनबाड़ी कार्यकत्री के घर भी गई लेकिन अब कोई भी सामग्री न आने की बात कहकर उन्हें वापस कर दिया गया जबकि गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों के घर घर जाकर पौष्टिक आहार बांटने का साफ निर्देश सरकार द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक कटरा के प्राथमिक विद्यालय परिसर में संचालित आंगनबाड़ी केन्द्र में कभी भी अपने बच्चों के लिए भोजन नहीं बनाया गया है। यहां के आंगनबाड़ी बच्चे, प्राथमिक विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के लिए बनने वाले मध्याह्न भोजन से हैं अपना भी पेट भरते हैं।

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