Lucknow News: सीएम योगी के फरमान को PPS और PCS अधिकारी कर रहे अनसुना, विजय खंड गोमतीनगर के मोहल्ले वालों का जीना किया दुश्वार

Sandesh Wahak Digital Desk: राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके गोमतीनगर में रहने वाले एक अफसर दंपति की कथित मनमानी से मोहल्लेवालों का जीना मुहाल हो गया है। सोशल मीडिया पर एक शिकायत पत्र वायरल हो रहा है, जिसमें निवासियों ने अपर नगर आयुक्त नम्रता सिंह और उनके पति, जीआरपी के सीओ अमित सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

नाम न छापने की शर्त पर पड़ोस में रहने वाले दंपति ने बताया कि नम्रता सिंह, जो विजयन खंड स्थित मकान नंबर 1/323 में रहती हैं, ने नाली को ढक कर जल निकासी का रास्ता रोक दिया है। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने मकान के कॉर्नर पर एक गेट खोलकर सरकारी जगह को अतिक्रमित कर पार्किंग बना दी है। पड़ोसियों का कहना है कि उनके घर के पास सरकारी नाले पर कब्जा कर लिया गया है और अब उसे निजी वाहन खड़ा करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

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अधिकारियों के घर के बाहर बने अवैध रैम्प

स्थानीय लोगों के अनुसार, अफसर दंपति ने इलाके में चार गाड़ियां स्थाई रूप से खड़ी कर रखी हैं, जिनमें नीली बत्ती लगी इनोवा, झंडा लगी स्कॉर्पियो और एक इंडिका शामिल है, जो एक बुजुर्ग पड़ोसी के घर के सामने तीन महीने से खड़ी है। पीड़ित पड़ोसी, आरएसएस से जुड़े वरिष्ठ नेता प्रभु नारायण श्रीवास्तव हैं, जिन्हें गाड़ी खड़ी करने के लिए रोज नई जगह ढूंढनी पड़ रही है।

इतना ही नहीं, आरोप है कि जब निवासियों ने आपत्ति जताई, तो अफसर दंपति की ओर से उन्हें धमकाया गया। यहां तक कि पुलिस में शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, उल्टा थाना प्रभारी विभूतिखंड द्वारा सीओ के कहने पर मोहल्लेवालों को डराया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने उच्च अधिकारियों से न्याय की अपील की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। निवासियों का कहना है कि प्रशासन और पुलिस दोनों ही अफसर दंपति के दबाव में हैं।

गोरखपुर में सीएम योगी का बयान

बीेजेपी सांसद रवि किशन और मुख्यमंत्री याेगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले ही अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे कि बारिश से पहले नालों की सफाई, जलनिकासी और ड्रेनेज सिस्टम दुरुस्त किए जाएं। सीएम का साफ कहना था कि जनता को किसी भी कीमत पर परेशान नहीं होना चाहिए। लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। गोमती नगर जैसे हाईप्रोफाइल इलाके में जब जलनिकासी की व्यवस्था फेल हो जाती है, तो बाकी शहर का क्या हाल होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं।

हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में भाजपा सांसद रवि किशन पर नाले के ऊपर अवैध निर्माण का आरोप लगाते हुए कहा, “हमने पहले ही चेतावनी दी थी कि जल निकासी मार्ग पर निर्माण न करें।” यह बयान लखनऊ के इस मामले को और प्रासंगिक बनाता है। ऐसे में यह सवाल उठना लाज़मी है कि जब खुद मुख्यमंत्री नालों पर अतिक्रमण को लेकर सख्त हैं, तो फिर राजधानी लखनऊ में बैठे अफसरों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

असल में नगर निगम कार्रवाई क्यों नहीं करता?

1. राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव

  • कई बार नगर निगम के ज़ोनल अफसर अधिकारियों, नेताओं या रसूखदारों के खिलाफ कार्रवाई करने से कतराते हैं।

  • उन्हें डर होता है कि कहीं तबादला न हो जाए या जवाब तलब न किया जाए।

2. दोहरे मापदंड (Double Standards)

  • आम लोगों के अतिक्रमण पर सुबह-सुबह बुलडोज़र चल जाता है,

  • लेकिन जब बात किसी PCS या PPS अधिकारी के घर की आती है, तो अधिकारी फाइलों में “जांच चल रही है” लिखकर मामला टाल देते हैं।

3. मक्खनबाजी और गठजोड़

  • कुछ मामलों में नगर निगम के अधिकारी ही मिलीभगत से नक्शा पास कर देते हैं या मौन सहमति दे देते हैं।

  • शिकायत होने के बाद भी “दबाव में” कार्रवाई नहीं होती।

नियम क्या कहते हैं?

  1. सार्वजनिक मार्ग (Public Road) पर अतिक्रमण निषेध है

    • घर के बाहर फुटपाथ, नाली या सड़क के हिस्से पर रैम्प बनाना अवैध अतिक्रमण की श्रेणी में आता है।

    • यह Indian Roads Congress (IRC) और स्थानीय नगर निगम उपविधियों का उल्लंघन है।

  2. ड्राइव-वे रैम्प (Driveway Ramp) की अनुमति तभी मिलती है जब-

    • वह पूरी तरह प्लॉट के अंदर हो।

    • नाली या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचाए।

    • वह नगर निगम से पूर्व स्वीकृति लेकर बनाया गया हो।

  3. नाली या फुटपाथ पर रैम्प बनाना गैरकानूनी है

    • इससे बारिश के पानी की निकासी रुकती है, जिससे जलभराव और स्वास्थ्य समस्याएं पैदा होती हैं।

    • ऐसी स्थिति में नगर निगम उसे अवैध निर्माण मानकर तोड़ सकता है।

  4. विशेष आवश्यकता के लिए बनाए जाने वाले रैम्प

    • अगर दिव्यांगजन के लिए रैम्प बनाया गया है, तो भी उसे निर्धारित मानकों (जैसे ढलान की तीव्रता, चौड़ाई आदि) के अनुरूप और प्रॉपर्टी की सीमा के भीतर ही बनाया जाना चाहिए।

  5. अतिक्रमण हटाओ अभियान के अंतर्गत कार्रवाई

    • नगर निगम बिना नोटिस दिए सड़क या नाली पर बने रैम्प को हटा सकता है।

    • साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

 

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