बाफिला महाघोटाला: अरबों के फर्जीवाड़े के दोषी एलडीए अफसरों को बचाने का षड़यंत्र
हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं, सीएससी ने प्रमुख सचिव आवास को भेजा था पत्र
Sandesh Wahak Digital Desk: बाफिला गैंग के उस भूखंड महाघोटाले को दबाने के उच्चस्तरीय प्रयास हो रहे हैं। जिसमें कई अफसरों की सीधी संलिप्तता है। बहुजन निर्बल वर्ग सहकारी गृह निर्माण समिति और द हिमालयन सहकारी आवास समिति से जुड़े लखनऊ के सबसे बड़े भूखंड महाघोटाले में सीएम से लेकर प्रमुख सचिव आवास पी गुरुप्रसाद तक सख्त हैं। प्रमुख सचिव ने एलडीए में बैठकें तक लीं। उसके बावजूद जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई करने से लेकर एफआईआर कराने तक में अफसर सिर्फ लीपापोती करने में जुटे हैं।

बाफिला गैंग पर मेहरबानियों का दौर जारी
हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराने के लिए मुख्य स्थायी अधिवक्ता (सीएससी) के अनुरोध पर शासन ने एलडीए को पत्र भी जारी किया था। फिर भी बाफिला गैंग पर मेहरबानियों का दौर जारी है। शासन में संयुक्त सचिव गिरीश चंद्र मिश्र ने एलडीए वीसी को 16 मई को एक पत्र भेजा था। जिसमें चीफ स्टैंडिंग काउन्सिल द्वारा प्रमुख सचिव आवास को भेजे पत्र का हवाला दिया गया था। शासन ने एलडीए वीसी को विशेष अपील संख्या 13/2025 हिमालयन समिति बनाम प्रमुख सचिव आवास में पारित आदेश दिनांक 23 अप्रैल 2025 के अनुपालन में अनुदेश उपलब्ध कराये के संबंध में पत्र भेजा था। इसमें हाईकोर्ट के उस आदेश का जिक्र था।

जिसमें कोर्ट ने कहा था कि वो तथ्यों को देखने के बाद आंखें नहीं बंद कर सकता है। हिमालयन समिति को अवैध तरीके से भूमि अधिग्रहण के एवज में दिए भारी मुआवजे के संबंध में उक्त कठोर टिप्पणी की थी। समिति सिर्फ साढ़े 12 एकड़ भूमि ही अधिग्रहीत कर सकती थी। लेकिन एलडीए अफसरों ने 22 अक्टूबर 2002 के शासनादेश की धज्जियां उड़ाते हुए ये कृत्य किया था। आवास आयुक्त की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई करने के निर्देश हाईकोर्ट ने सरकार को दिए थे।

इसमें दोषी अफसरों-कर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही करने को हाईकोर्ट ने कहा था। की रिपोर्ट ने एलडीए की साठगांठ उजागर की थी। कार्रवाई के साथ सीएजी से ऑडिट समेत कई अहम संस्तुतियां भी की थी। हाईकोर्ट ने भी विजिलेंस निदेशक से जांच कराने के आदेश दिए थे।
स्पेशल अपील में पार्टी बने थे तत्कालीन प्रमुख सचिव आवास
सीएससी ने कहा था कि मामले में स्पेशल अपील फाइल की गयी है। इसमें तत्कालीन प्रमुख सचिव देवेश चतुर्वेदी पार्टी भी हैं। सीएससी ने प्रमुख सचिव आवास से हाईकोर्ट के 23 अप्रैल 2025 के आदेश के संबंध में जरुरी दिशानिर्देश जारी करने को कहा था। इसके बावजूद आज तक एलडीए के दोषी अफसरों और कर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई इतने बड़े महाघोटाले में नहीं किया जाना भूमाफियाओं से गहरी साठगांठ को दर्शाता है।
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