Lucknow Development Authority: धड़ल्ले से चल रहा ‘सीलिंग’ में ‘डीलिंग’ का खेल

Sandesh Wahak Digital Desk: लखनऊ में अवैध निर्माण को बढ़ावा देने में भवन स्वामी ही नहीं बल्कि एलडीए भी बराबर का जिम्मेदार है। यही कारण है कि पहले एलडीए भवन स्वामियों को अवैध निर्माण की नोटिस जारी कर परेशान करता है बाद में सेटिंग होते ही वही अवैध निर्माण सील मुक्त कर दिए जाते हैं, यही नहीं उनका वाद भी समाप्त कर दिया जाता है। यह खेल किसी एक जगह नहीं बल्कि पूरे शहर में जारी है। नियमों व तथ्यों को छुपाकर सैकड़ों वाद समाप्त करने का खेल एलडीए में खूब चल रहा है।

नोटिस और कार्रवाई का खूब चला सिलसिला

एलडीए प्रवर्तन जोन- छह स्थित थाना अमीनाबाद अंतर्गत नजीराबाद से नाका को जाने वाली सडक़ पर अजय ज्वैलर्स एण्ड बैकर्स के सामने किए जा रहे अवैध निर्माण पर एलडीए के इंजीनियर व अफसर मेहरबान हैं। शुरुआत में उक्त अवैध निर्माण के खिलाफ एलडीए के इंजीनियरों ने मोर्चा खोल रखा था, नोटिस और कार्रवाई का सिलसिला खूब चला। फिर अचानक एलडीए अफसर भवन स्वामी पर मेहरबान हो गए और करीब नौ महीने बाद नियमों की आड़ में निर्माण की सील खोलते हुए वाद समाप्त कर दिया गया।

एलडीए के प्रवर्तन जोन-6 की ओर से अमीनाबाद के इस अवैध निर्माण के खिलाफ 08 अगस्त 2024 को वाद संख्या-437/2024 योजित किया गया था। उस समय एलडीए के इंजीनियरों ने धारा- 27(1) व 28 (1) की नोटिस में निर्माणाधीन भूखंड का क्षेत्रफल 134 वर्ग मीटर दिखाया था जिसपर व्यावसायिक प्रयोग के लिए बेसमेंट, भूतल का कॉलम, बीम, स्लैब व दीवार का निर्माण पूर्ण करने व प्रथम तल पर कॉलम का निर्माण करने का जिक्र किया गया था। अवैध निर्माण न बंद करने के क्रम में एलडीए की विहित प्राधिकारी कोर्ट की ओर से 06 सितंबर 2024 को निर्माणाधीन भवन को सील करने का आदेश पारित किया गया और अगले दिन 07 सितंबर 2024 को पुलिस बल की मौजूदगी में भवन सील कर दिया गया।

पहले होती है नोटिस से लेकर सील करने की कार्रवाई, सेटिंग होते ही खुल जाती है सील

इस बीच भवन स्वामी ने भवन को सीलमुक्त कराने के लिए एलडीए अफसरों को पत्र लिखकर यह बताया कि उन्होंने कोई नया निर्माण नहीं किया है और पुराने मकान की मरम्मत का कार्य काराया जा रहा है। इस क्रम में प्रवर्तन जोन-छह की ओर से 25 मार्च 2025 को निरीक्षण आख्या प्रस्तुत की गई कि जिसमें यह साफ कहा गया कि प्रश्नगत स्थल पर मरम्मत नहीं बल्कि नया निर्माण कराया गया है। निर्माण के संबंध में भवन  स्वामी द्वारा व्यावसायिक शमन मानचित्र भी दिया गया है जिसके अनुसार भूखंड का क्षेत्रफल 71.09 वर्गमीटर है। जिसमें कुछ शमनीय व अशमनीय भाग शामिल हैं। भवन स्वामी ने पुन: 26 मार्च 2025 को पत्र के माध्यम से कुछ शासनादेशों का हवाला देते हुए भवन को सीलमुक्त करने व वाद समाप्त करने का निवेदन किया। इसी क्रम में विहित प्राधिकारी ने 27 मार्च 2025 को भवन सीलमुक्त करने व वाद समाप्त करने का आदेश पारित कर दिया। उक्त मामला तो केवल बानगी है, एलडीए में कुछ वर्षों में सैकड़ों की संख्या में वाद समाप्त किए जा चुके हैं।

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