बीसी जिंदल समूह पर ईडी का शिकंजा, फेमा नियमों के उल्लंघन का आरोप
Sandesh Wahak Digital Desk: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हाल ही में बीसी जिंदल समूह की कंपनियों और उनके निदेशकों पर शिकंजा कसा है। उन पर विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है।
ईडी को शक था कि जिंदल समूह ने विदेशों में निवेश और पैसों के हेरफेर के जरिए नियमों को तोड़ा है। जाँच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। पता चला कि जिंदल समूह की एक कंपनी, जेपीएफएल (JPFL) ने दुबई की अपनी विदेशी कंपनी टोपाज एंटरप्राइज डीएमसीसी को $505.14 करोड़ का लोन दिया। इस पैसे का इस्तेमाल एक अन्य विदेशी कंपनी, गार्नेट एंटरप्राइज डीएमसीसी, के शेयर खरीदने के लिए किया गया। यह पैसा कथित तौर पर ओवरसीज डायरेक्ट इनवेस्टमेंट (ODI) की आड़ में भेजा गया था।
जांच में यह भी सामने आया कि जेपीएफएल ने 2013-14 और 2016-17 के बीच जिंदल इंडिया पावरटेक लिमिटेड में 703.79 करोड़ रुपये का निवेश किया था। बाद में इस कंपनी को जेआईटीपीएल (JITPL) में मिला दिया गया। हैरानी की बात यह है कि 2018-19 में जेपीएफएल ने इस निवेश को वापस लेने के बजाय, इसे नुकसान में दिखाकर बट्टे खाते में डाल दिया और अपनी ही दूसरी कंपनियों को औने-पौने दामों में बेच दिया।
और भी गड़बड़ियाँ सामने आईं। जेआईटीपीएल को तरजीही शेयरों से ₹853.72 करोड़ मिले थे, लेकिन यह पैसा जेपीएफएल को वापस करने के बजाय टोपाज एंटरप्राइज डीएमसीसी को $505.14 करोड़ ट्रांसफर कर दिया गया, जिसने गार्नेट एंटरप्राइज की पूरी हिस्सेदारी खरीद ली। ईडी को पता चला कि गार्नेट एंटरप्राइज टोपाज की ही सहायक कंपनी है, जिसके जरिए नीदरलैंड, अमेरिका, बेल्जियम, इटली, सिंगापुर और कई अन्य देशों में जिंदल परिवार की विदेशी कंपनियों में पैसा लगाया गया।
तलाशी में मिले दस्तावेजों से यह भी साबित हुआ कि 505.14 करोड़ रुपये का यह लेनदेन झूठे दस्तावेज़ों और फर्जी मूल्यांकन के आधार पर किया गया था। दो अलग-अलग मूल्यांकनकर्ताओं ने जानबूझकर शेयरों की कीमत बढ़ा-चढ़ाकर बताई ताकि ज़्यादा पैसा विदेश भेजा जा सके। इस पूरे गोरखधंधे का असली कर्ता-धर्ता श्याम सुंदर जिंदल है, जो इन विदेशी कंपनियों का मालिक है।
ईडी ने यह भी खुलासा किया कि जिंदल समूह ने नीदरलैंड, अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, जर्मनी और अन्य देशों में भी फेमा नियमों का उल्लंघन करते हुए पैसा जमा किया था। दिलचस्प बात यह है कि जब ईडी ने श्याम सुंदर जिंदल से पूछताछ करने की कोशिश की, तो वे हांगकांग में होने का बहाना बनाकर जांच से बचते रहे। ईडी की जांच अभी भी जारी है।
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