Siddharthnagar News: देवपुरमस्जिदिया गांव पर मंडरा रहा अस्तित्व का संकट, DM ने दिया बोल्डर पिचिंग का आश्वासन
Siddharthnagar News: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में कोतवाली लोटन क्षेत्र के देवपुरमस्जिदिया गांव के निवासी कूड़ा नदी के भीषण कटान से दहशत में हैं। गांव के पश्चिम दिशा में स्थित केजी बांध और कूड़ा नदी के कारण हो रहे लगातार कटान से भयभीत ग्रामीणों ने अब जिलाधिकारी (डीएम) डॉ. राजा गणपति आर. और राज्य सरकार से बोल्डर पिचिंग और ठोकर (बाढ़ रोकने के लिए मजबूत संरचना) की मांग की है।
ग्रामीणों ने डीएम से गुहार लगाई है कि कूड़ा नदी द्वारा पूर्व में हुए कटान को रोकने के लिए लगाया गया पर्कोंपाइन और बोरी अब नाकाफी साबित हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि ड्रेनेज खंड और जिला प्रशासन ने समय रहते कटान नहीं रोका, तो देवपुरमस्जिदिया सहित एक दर्जन गांवों का अस्तित्व मिटने में देर नहीं लगेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
डीएम डॉ. राजा गणपति आर. ने इस मामले को गंभीरता से संज्ञान में लिया है और ग्रामीणों की मांग को वाजिब ठहराया है। उन्होंने ड्रेनेज खंड सिद्धार्थनगर को तुरंत एक प्रोजेक्ट बनाकर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है, जिसे समय रहते शासन को भेजा जाएगा। डीएम ने कहा, शासन से मंजूरी मिलते ही कटान स्थल देवपुरमस्जिदिया पर बोल्डर पिचिंग कराकर बाढ़ बचाव कटान स्थल की सुरक्षा की जाएगी। बाढ़ बचाव कार्य में किसी तरह की लापरवाही नहीं होगी।
ड्रेनेज खंड ने भेजा सुरक्षा प्रस्ताव
इस संबंध में अधिशासी अभियंता ड्रैनेज खंड सिद्धार्थनगर कृपाशंकर भारतीय ने बताया कि देवपुरमस्जिदिया गांव की कटान पर लगभग 200 से 250 मीटर तक की जियोबैग से स्लोपिंग पिचिंग, जियो बैग लॉन्चिंग एप्रोन और पर्कोपाईन द्वारा बाढ़ बचाव का सुरक्षा प्रस्ताव शासन एवं सिंचाई विभाग मुख्यालय को भेजा जा रहा है। उन्होंने भी माना कि ग्रामीणों की मांग जायज है और आदेश मिलते ही सुरक्षात्मक कार्य शुरू हो जाएगा।

क्या है केजी (KG) बांध और दोआबा क्षेत्र का इतिहास
सिद्धार्थनगर के नौगढ़ तहसील के लोटन ब्लॉक में घोघि नदी (G) और कूड़ा नदी (K) नाम की दो मुख्य नदियाँ बहती हैं। इन दोनों नदियों के बीच के भू-भाग को दोआबा क्षेत्र कहते हैं। बारिश के मौसम में दोनों नदियाँ उफन जाती थीं, जिससे लोटन ब्लॉक की करीब 54 ग्राम पंचायतों में बाढ़ आ जाती थी। इस भीषण बाढ़ से दोआबा क्षेत्र की हिफ़ाज़त के लिए ही प्रथम पंचवर्षीय योजना में तत्कालीन सरकार द्वारा 47 किलोमीटर लंबे बांध का निर्माण किया गया था, जिसे KG (कूड़ा-घोघि) बांध के नाम से जाना जाता है।
रिपोर्ट- जाकिर खान
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