नीतीश कुमार ने 10वीं बार ली बिहार के CM पद की शपथ, सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा बने उपमुख्यमंत्री
Sandesh Wahak Digital Desk: बिहार की राजनीति के अपराजेय नेता और ‘चाणक्य’ कहे जाने वाले नीतीश कुमार ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। उन्होंने आज राजभवन में एक भव्य समारोह में बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर अपना दसवां कार्यकाल शुरू किया। राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
साथ मिला भाजपा का भारी-भरकम दमखम
इस ऐतिहासिक क्षण को और भी खास बनाया केंद्र सरकार और भाजपा के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी ने। समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा जैसे दिग्गज मौजूद रहे। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडनवीस भी इस मौके पर चमक बिखेरते नजर आए।
नीतीश कुमार के साथ ही सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा ने भी उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जिससे साफ हो गया कि एनडीए गठबंधन मजबूती से साथ चल रहा है।

लालू के साथी से लेकर बिहार के सुल्तान तक
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर कोई आसान नहीं रहा। उनकी यह यात्रा करीब चार दशक पुरानी है। 1985 में जनता दल से शुरुआत करने वाले नीतीश ने शुरुआत में लालू प्रसाद यादव के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। लेकिन जल्द ही दोनों के रास्ते अलग हो गए। 1994 में नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद के खिलाफ बगावत का बिगुल बजाया और जॉर्ज फर्नांडीस के नेतृत्व में अलग हुए। यही से उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनानी शुरू की। 1996 में भाजपा से हाथ मिलाकर उन्होंने एक नए राजनीतिक दौर की नींव रखी। अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्होंने रेल मंत्री के रूप में शानदार काम किया।

उतार-चढ़ाव भरा रहा मुख्यमंत्री बनने का सफर
मुख्यमंत्री बनने का उनका पहला मौका 2000 में आया, लेकिन उनकी सरकार महज सात दिन में ही गिर गई। मगर नीतीश कुमार हार मानने वालों में से नहीं थे। 2005 में उन्होंने शानदार वापसी करते हुए लालू प्रसाद के 15 साल के शासन का सूरज डूबा दिया और बिहार में विकास का एक नया अध्याय शुरू किया।
इसके बाद तो नीतीश कुमार ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा, हालांकि उनके राजनीतिक गठबंधन में कई बार बदलाव आए। 2013 में भाजपा से अलग हुए, तो 2015 में लालू प्रसाद के साथ ‘महागठबंधन’ बनाया। 2017 में फिर भाजपा के साथ जुड़े और 2022 में एक बार फिर महागठबंधन में लौटे। लेकिन 2024 में आम चुनाव से पहले एक बार फिर एनडीए में वापसी कर ली।
इसी निरंतरता और राजनीतिक कौशल का नतीजा है कि 2025 के विधानसभा चुनावों में एनडीए गठबंधन ने एक बार फिर शानदार जीत दर्ज की और 202 से ज्यादा सीटें हासिल कीं। यह 2010 के बाद दूसरा मौका है जब एनडीए ने 200 का आंकड़ा पार किया है।
आज का दिन बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय का प्रतीक है। नीतीश कुमार ने अपने दसवें कार्यकाल की शुरुआत करके न सिर्फ एक नया रिकॉर्ड बनाया है, बल्कि यह साबित भी कर दिया है कि बिहार की राजनीति में उनका जादू अब भी बरकरार है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वे इस बार बिहार के विकास के लिए कौन से नए मंत्र लेकर आते हैं।

