आंखें ही दे देती हैं किडनी रोग का पहला संकेत, जानें क्या हैं लक्षण

Sandesh Wahak Digital Desk: अक्सर लोग किडनी बीमारी को थकान, पैरों में सूजन या यूरिन में बदलाव से जोड़ते हैं, लेकिन कई बार इसका शुरुआती असर आंखों में दिखने लगता है। वजह यह है कि किडनी और आंखें दोनों ही शरीर की छोटी-छोटी नसों और फ्लूइड बैलेंस पर निर्भर होती हैं। जब किडनी सही तरीके से काम नहीं करती, तो शरीर के टॉक्सिन्स और प्रोटीन के स्तर बदलने लगते हैं, जिसका सीधा असर आंखों पर दिखाई देने लगता है। शुरुआत में लक्षण हल्के होते हैं, जैसे- पलकें सूजना, धुंधला दिखाई देना, आंखों में जलन या लालपन। लेकिन इन्हें नज़रअंदाज़ करना किडनी स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकेत हो सकता है।

आंखों पर कैसे दिखता है असर?

National Kidney Foundation के अनुसार, किडनी शरीर का फिल्टर सिस्टम है जो खून को साफ करती है और फ्लूइड लेवल नियंत्रित रखती है। वहीं, आंखें बेहद नाजुक नसों और फ्लूइड पर निर्भर होती हैं। जैसे ही किडनी ब्लड वेसल्स या फ्लूइड बैलेंस को प्रभावित करती है, आंखों में तुरंत बदलाव उभरने लगते हैं। इसलिए कई बार आंखों में दिखने वाली समस्या असल में किडनी रोग का शुरुआती संकेत हो सकती है।

किडनी की समस्या बढ़ने पर आंखों की नसें, नमी और रेटिना की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है। इससे विज़न, आंखों की नमी और रंगों को पहचानने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है। यही वजह है कि शुरुआती लक्षणों को सामान्य आंखों की बीमारी समझकर अनदेखा करना खतरनाक हो सकता है।

आंखों में सूजन: कभी-कभी देर रात जागने या नमक ज्यादा खाने से आंखें सूज जाती हैं, लेकिन अगर यह सूजन दिनभर बनी रहे, तो यह किडनी में प्रोटीन लीक होने का संकेत है। जब किडनी प्रोटीन को फिल्टर नहीं कर पाती, तो वही प्रोटीन शरीर से यूरिन में निकलने लगता है। इसका असर आंखों के आसपास पफीनेस या Swelling के रूप में दिखता है। अगर आंखों की सूजन के साथ यूरिन झागदार दिखे या फोम जैसा बने, तो तुरंत डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है, क्योंकि यह प्रोटीन लीक होने का साफ संकेत है और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है।

धुंधला या दोहरा दिखाई देना: अचानक धुंधला दिखना, दोहरी तस्वीरें दिखना या विज़न में ब्लरनेस, ये संकेत रेटिना की छोटी नसों के खराब होने के हैं। हाई BP और डायबिटीज, किडनी खराब होने के दो बड़े कारण, रेटिना की नसों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। नसों के कमजोर होने और फ्लूइड जमा होने से रेटिना सूज सकती है, जिससे विज़न लॉस तक की संभावना बन सकती है। अगर आप डायबिटिक हैं या हाई BP की हालत में हैं और आपको विज़न में बदलाव महसूस हो, तो आंखों के साथ किडनी की जांच भी करवाना बेहद जरूरी है।

आंखों का सूखापन और जलन: आंखों का सुखना, जलन, खुरदुरापन या लालपन सिर्फ मौसम, धूल या स्क्रीन टाइम की वजह से नहीं होता। किडनी बीमारी के बढ़ने और डायलिसिस लेने वाले मरीजों में ड्राई आई एक आम समस्या है। कैल्शियम-फॉस्फोरस असंतुलन और शरीर में टॉक्सिन जमा होने से आंसू बनना कम हो जाता है। इससे आंखों में सूखापन लगातार बना रहता है। अगर आंखों में बिना वजह सूखापन और जलन दिनभर बनी रहे, तो सिर्फ आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल न करें। किडनी फंक्शन टेस्ट जरूर कराएं।

 

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