UP News: अरबों के पिकप घोटाले के असली खिलाड़ियों को ईओडब्ल्यू ने बख्शा
बाराबंकी को सियासी कर्मभूमि बनाने वाले पूर्व एमडी ने बांटा था फर्जी कंपनियों को बेहिसाब ऋण, किसके दबाव में हो रही मेहरबानी
Sandesh Wahak Digital Desk/Manish Srivastava: प्रदेशीय औद्योगिक एवं निवेश निगम (पिकप) में तीन दशक पहले अंजाम दिया गया सैकड़ों करोड़ का घोटाला फिर सुखिऱ्यों में है। आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (ईओडब्ल्यू) ने हाल ही में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
लेकिन पिकप के जिन तत्कालीन बड़े अफसरों ने इतने बड़े घोटाले की नींव फर्जी कंपनियों को ऋण बांटकर रखी थी। उनकी गर्दन तक अभी भी ईओडब्ल्यू के हाथ नहीं पहुंचे हैं। जबकि इससे पहले खुद ईओडब्ल्यू ने ही तत्कालीन कद्दावर अफसर को दोषी ठहराया था।
घोटालेबाजों को किसके दबाव में बख्शा जा रहा?
आखिर किसके दबाव में घोटालेबाज़ों को बख्शा जा रहा है। 90 के दशक में पिकप के जरिये कई फर्मों को अरबों के ऋण बांटे गए थे। जाली दस्तावेजों के आधार पर अफसरों की साठगांठ से जिन फर्मों को भारी पैसा दिया गया। उनमें से अधिकांश फर्जी भी निकली थीं। बाद में गोमतीनगर थाने में दर्ज सभी मुकदमें शासन ने ईओडब्ल्यू को विवेचना के लिए भेजे।
इन्ही घोटालों के चलते पिकप आज बंद होने की कगार पर खड़ा है। ईओडब्ल्यू ने चंद दिनों पहले मथुरा की विजय केमिकल्स(इण्डिया) के शरद चतुर्वेदी को 580 करोड़ सात लाख 57 हजार के गबन पर गिरफ्तार किया है। वहीं 66 करोड़ के ऋण को हड़पने वाले रुहेलखंड एग्रो के फरार प्रमोटर सुनील भाटिया को भी दिल्ली से पकड़ा गया है। दोनों फर्मों ने 93 में ऋण लेकर धनराशि का गबन किया था।
पूर्व सीएम मायावती-मुलायम के बेहद करीबी थे पूर्व एमडी
दरअसल कंपनियों को ऋण देने में पूर्व सीएम मायावती-मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी रहे एक कद्दावर आईएएस का सबसे अहम रोल था। यही अफसर पिकप में एमडी के तौर पर फर्जी कंपनियों को अरबों का ऋण बांट रहा था। पिकप समेत कई घोटालों में गर्दन फंसी देख बाद में इस आईएएस ने खाकी का लबादा पहनकर सियासत में कदम रख दिया। लखनऊ से सटे बाराबंकी को पिकप के इस पूर्व एमडी ने अपनी सियासी कर्मभूमि बनाई। बसपा सुप्रीमो मायावती के बाद जब सपा ने यूपी में सरकार बनाई तो ईओडब्ल्यू के तत्कालीन डीजी ने पिकप घोटाले की जांच पूरी करके गृह विभाग को भेजी।
अरबों के ऋण घोटाले में ईओडब्ल्यू ने पिकप के इस पूर्व एमडी को दोषी ठहराते हुए जांच रिपोर्ट कई वर्ष पूर्व भेजी थी। लेकिन सियासी दबाव में शासन ने ईओडब्ल्यू की जांच रिपोर्ट में कई आपत्तियां लगाते हुए उसे वापस भेज दिया। ईओडब्ल्यू से जुड़े एक पूर्व डीजी के मुताबिक ऋण हासिल करने वाली कंपनियों द्वारा विदेश यात्राओं का खर्च उठाने समेत इनमें पूर्व एमडी की हिस्सेदारी के आरोपों की जांच भी शुरू हुई थी। तकरीबन तीन दशक बाद ईओडब्ल्यू ने पिकप घोटाले में गिरफ्तारियों को सिलसिला तो शुरू किया। लेकिन इस निगम को अरबों की लूट का अड्डा बनाने वाले तत्कालीन बड़े अफसरों को बख्श दिया।
15 वर्ष पहले आयकर विभाग ने तत्कालीन मुख्य सचिव को भेजा था पत्र
यूपी के एक पूर्व मुख्य सचिव को 15 साल पहले आयकर विभाग ने पिकप के पूर्व एमडी की पत्नी के खिलाफ पत्र भेजा था। जिसमें पत्नी के प्लॉट, मकान समेत अकूत सम्पत्तियों का जिक्र था। पेंटिंग्स के नाम पर भी कालेधन को स$फेद करने संबंधी आरोप पत्र में थे। आयकर विभाग के पत्र पर तत्कालीन मुख्य सचिव ने सियासी दबाव में जांच शुरू नहीं कराई।
शासन को भेजी रिपोर्ट में दोषी थे तत्कालीन एमडी : पूर्व डीजी
ईओडब्ल्यू के एक पूर्व डीजी ने संदेशवाहक से साफ तौर पर कहा कि मेरे कार्यकाल में पिकप घोटाले की जांच पूरी करके शासन को भेजी गयी थी। ऋण पाने वाली कई फर्में फर्जी भी थीं। इस घोटाले में तत्कालीन एमडी की पूरी संलिप्तता थी। उन्हें विवेचना में दोषी माना गया था। लेकिन शासन ने कुछ बिंदुओं पर आख्या मांगते हुए पुनर्विचार की बात कहकर रिपोर्ट वापस कर दी थी। बाद में मेरा ट्रांसफर ईओडब्ल्यू से कर दिया गया।
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