‘डिजिटल अरेस्ट’ कर साइबर फ्रॉड करने वाले गिरोह का सदस्य लखनऊ से गिरफ्तार, UP STF ने दबोचा
Sandesh Wahak Digital Desk: उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने पुलिस/नारकोटिक्स/क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर धमकाकर साइबर धोखाधड़ी (Cyber Fraud) करने वाले एक संगठित गिरोह के सदस्य को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है।
गिरफ्तार अभियुक्त का विवरण
| विवरण | जानकारी |
| नाम | प्रदीप सोनी पुत्र मुन्ना लाल सोनी |
| उम्र | लगभग 40 वर्ष |
| निवासी | 60 दुर्गा मार्ग, गली न. 1, वार्ड न. 18 ढलकपुरा, थाना कोतवाली, विदिशा, मध्य प्रदेश |
| गिरफ्तारी | 04 दिसंबर 2025 को रात 08:20 बजे |
| स्थान | फिनिक्स पलासियो मॉल के पीछे, गोमतीनगर विस्तार, लखनऊ |
गिरफ्तार अभियुक्त प्रदीप सोनी के पास से कुल 02 मोबाइल फोन, एक पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, ब्लैंक चेक, एटीएम कार्ड, आधार कार्ड, आरसी, सिम कार्ड और साइबर क्राइम में प्रयुक्त बैंक खातों की जानकारी वाले 10 स्क्रीनशॉट बरामद किए गए हैं।
धोखाधड़ी का मुख्य मामला
यह गिरोह प्रोफेसर डॉ. बी.एन. सिंह (लखनऊ) को निशाना बनाने वाले एक बड़े मामले में शामिल था।
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घटनाक्रम: 6 अप्रैल 2025 को, डॉ. सिंह को ब्लू डॉट कूरियर कंपनी का अधिकारी बनकर एक व्हाट्सएप कॉल आया। उन्हें बताया गया कि उनके नाम से एक ‘अवैध पार्सल’ पकड़ा गया है।
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डिजिटल अरेस्ट: इसके बाद, कथित जांच अधिकारी (के. मोहनदास) बनकर पुलिस की वर्दी में एक व्यक्ति ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल किया। उसने डॉ. सिंह पर उनके आधार नंबर के दुरुपयोग से अवैध सामान भेजने का आरोप लगाया और जाँच में सहयोग के नाम पर उन्हें ‘जांच प्रभावित न हो’ कहकर किसी से संपर्क न करने की धमकी दी।
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रंगदारी: इस ‘डिजिटल अरेस्ट’ के दौरान, कथित अधिकारी ने डॉ. सिंह को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का कूटरचित पत्र भेजकर तत्काल ₹95 लाख बताए गए बैंक खाते में ट्रांसफर करने को कहा, जिसे जाँच पूरी होने पर वापस करने का आश्वासन दिया गया।
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ट्रांसफर: डॉ. सिंह ने 8 अप्रैल 2025 को ₹95 लाख ट्रांसफर कर दिए।
जांच और गिरोह की कार्यप्रणाली
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साइबर एनालिसिस: तकनीकी विशेषज्ञता के आधार पर पता चला कि इस बैंक खाते में लगभग ₹1 करोड़ 40 लाख का साइबर फ्रॉड किया गया है। डॉ. सिंह से ठगे गए ₹95 लाख को कुल 420 ट्रांजेक्शन के माध्यम से 11 लेयर तक के बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया था।
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पिछली गिरफ्तारी: इसी क्रम में, एसटीएफ ने 24 जुलाई 2025 को महाराष्ट्र के ठाणे से दो अभियुक्तों मोहम्मद इकबाल और शाइन इकबाल को गिरफ्तार किया था।
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अभियुक्त की भूमिका (प्रदीप सोनी): प्रदीप सोनी ने पूछताछ में बताया कि वह बेरोजगार होने के बाद रिश्तेदार अखिलेश के माध्यम से अमित कैथवास उर्फ केटू और रोहित लोधी उर्फ बिट्टू से मिला। वह लालच में आकर रोहित के लिए किराए पर बैंक खाते की किट (एटीएम, सिम, चेकबुक, इंटरनेट बैंकिंग जानकारी सहित) उपलब्ध कराता था।
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वित्तीय लेनदेन: वह साइबर ठगी (डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन गेमिंग, शेयर ट्रेडिंग फ्रॉड) से आए पैसों को एटीएम कार्ड की लिमिट के अनुसार निकालकर, रोहित द्वारा बताए गए अन्य खातों में सीडीएम मशीन से जमा करने का काम करता था, जिसके लिए उसे कमीशन मिलता था।
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पैसे का बँटवारा: अप्रैल 2025 में ठगे गए ₹95 लाख को गिरोह के सदस्यों ने विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर, एटीएम से कैश और क्रिप्टो करेंसी में बदलकर आपस में बाँट लिया। खाताधारक (इकबाल बंधुओं) को 10% कमीशन दिया गया था।
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संगठित गिरोह: प्रदीप सोनी धीरे-धीरे संगठित गिरोह का सक्रिय सदस्य बन गया। इस गिरोह के अन्य सदस्य एपीके फाइल लगाना, पैनल चलाना और रुपयों को क्रिप्टो वॉलेट में भेजने जैसे तकनीकी कार्य करते हैं। ये सदस्य अक्सर छद्म नाम (जैसे मनोहर, संजू, राहुल) का उपयोग करते थे और व्हाट्सएप से संपर्क करते थे।
मामला दर्ज
गिरफ्तार अभियुक्त प्रदीप सोनी को मु.अ.सं. 60/2025 में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 318(4), 319(2), 351(4), 308(2), 308(3), 308(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2)B तथा आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत थाना साइबर क्राइम, लखनऊ में दाखिल कर आवश्यक विधिक कार्यवाही की जा रही है।
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