Lucknow News: महापरिनिर्वाण दिवस पर मायावती का बड़ा सवाल, संविधान के बावजूद बहुजनों के अच्छे दिन क्यों नहीं आए
Lucknow News: भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के 69वें महापरिनिर्वाण दिवस पर शनिवार को देशभर में उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। इस मौके पर बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने एक महत्वपूर्ण और भावुक सवाल उठाया।
मायावती ने गहरी चिंता जताते हुए पूछा कि संविधान निर्माता के दिखाए रास्ते पर चलने के बावजूद करोड़ों बहुजनों को अभी तक आत्म-सम्मान और स्वाभिमान युक्त अच्छे दिन क्यों नहीं मिले हैं? बसपा प्रमुख ने नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर बाबा साहेब को नमन किया। वहीं, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती तट पर बसपा सरकार द्वारा बनवाए गए भव्य डॉ. भीमराव अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल पर हजारों कार्यकर्ता और अनुयायी एकत्र हुए।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड के लोग नोएडा में राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल एवं ग्रीन गार्डन में उमड़े, जहाँ पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद ने भी बाबा साहेब को श्रद्धासुमन अर्पित किए। मायावती ने देश भर के सभी कार्यकर्ताओं, खासकर उत्तर प्रदेश के लोगों का तहे-दिल से धन्यवाद किया।
देश में करोड़ों-करोड़ ’बहुजन समाज’ के मसीहा भारतरत्न परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को आज उनके परिनिर्वाण दिवस (देहान्त) पर मेरे द्वारा नई दिल्ली निवास स्थान पर तथा उत्तर प्रदेश के 12 मण्डलों के पार्टी के लोगों व बाबा साहेब के अनुयाइयों द्वारा यू.पी. की राजधानी लखनऊ में…
— Mayawati (@Mayawati) December 6, 2025
एक्स पर अपनी लंबी पोस्ट में मायावती ने स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस का उल्लेख करते हुए कड़ा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब की जयंती और पुण्यतिथि पर यह सवाल बार-बार मन में आता है कि संविधान के पवित्र मानवतावादी और कल्याणकारी उद्देश्यों पर आधारित करोड़ों बहुजनों के आत्म-सम्मान व स्वाभिमान युक्त अच्छे दिन कब आएंगे।
बसपा सुप्रीमो ने खुद को देश की एकमात्र अंबेडकरवादी पार्टी बताते हुए चिंता जताई कि जिन दलितों, आदिवासियों, अन्य पिछड़ा वर्ग और धार्मिक अल्पसंख्यकों के हित-कल्याण के लिए बाबा साहेब ने संघर्ष किया और संविधान में विशेष अधिकार दिलवाए, उन करोड़ों शोषित-पीड़ित लोगों को अभी तक थोड़े से भी अच्छे दिन क्यों नहीं मिले हैं। अंत में, उन्होंने बाबा साहेब को शत्-शत् नमन करते हुए संकल्प दोहराया कि बसपा उनकी विचारधारा पर चलते हुए बहुजन समाज के हक-अधिकारों की लड़ाई अंतिम सांस तक लड़ती रहेगी।

