Lucknow News: KGMU में धर्मांतरण का दबाव! पीड़िता की तहरीर पर FIR
Lucknow News: राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) में धर्मांतरण के दबाव और शोषण के आरोपों से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। पीड़िता की ओर से चौक कोतवाली में तहरीर दिए जाने के बाद पुलिस ने आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। महिला डॉक्टर ने शादी का झांसा देकर शारीरिक और मानसिक शोषण करने, धर्मांतरण का दबाव बनाने और विरोध करने पर अश्लील वीडियो व फोटो वायरल करने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं।
आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर के खिलाफ FIR
पीड़िता की शिकायत के आधार पर चौक कोतवाली में आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर रमीज रजा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। महिला दारोगा ने पीड़िता के धारा 161 के तहत बयान दर्ज किए हैं। पुलिस के अनुसार, आज महिला डॉक्टर के कोर्ट के समक्ष भी बयान दर्ज कराए जाएंगे, ताकि मामले की जांच को आगे बढ़ाया जा सके।
इस पूरे प्रकरण की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक भी पहुंची। पीड़िता से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने उसे इंसाफ दिलाने का भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री के संज्ञान में आते ही शासन के अधिकारी भी सक्रिय हो गए। इसी क्रम में महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव को अपनी पूरी आपबीती बताई। मीडिया के सामने अपनी पीड़ा साझा करते समय पीड़िता भावुक हो गई और फफक-फफक कर रोने लगी। महिला आयोग ने उसे न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है।
पीड़िता की बढ़ाई गई सुरक्षा
मामले की गंभीरता को देखते हुए देर शाम चौक कोतवाली से महिला सिपाही की तैनाती पीड़िता की सुरक्षा के लिए कर दी गई। चौक कोतवाली के इंस्पेक्टर नागेश उपाध्याय ने बताया कि हॉस्टल में भी पुलिस टीम की आवाजाही जारी है, ताकि किसी तरह की अनहोनी न हो।
दरअसल इस मामले में 17 दिसंबर को उस समय नया मोड़ आया, जब महिला रेजिडेंट डॉक्टर ने गोलियां खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। आरोप है कि केजीएमयू प्रशासन ने शुरू में मामले को गंभीरता से लेने के बजाय उसे दबाने और लीपापोती करने की कोशिश की। हॉस्टल में घटी घटना की गहराई से जांच तक नहीं की गई। शासन-प्रशासन में किरकिरी होने के बाद केजीएमयू प्रशासन हरकत में आया।

विशाखा कमेटी को सौंपी गई जांच
केजीएमयू की कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद के निर्देश पर सोमवार को मामले की जांच सात सदस्यीय विशाखा कमेटी को सौंपी गई। कमेटी ने आनन-फानन में पीड़िता और आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर को फोन कर बुलाने का प्रयास किया। कई बार फोन न उठने पर दोनों को लिखित नोटिस व्हाट्सऐप के माध्यम से भेजा गया, जिसके बाद उनसे संपर्क हो सका।
जांच की जानकारी मिलते ही आरोपी पुरुष रेजिडेंट डॉक्टर ने तबीयत खराब होने का हवाला देते हुए विभागाध्यक्ष से छुट्टी की मांग की। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए विभागाध्यक्ष ने छुट्टी देने से इनकार कर दिया और उसे जांच में सहयोग करने के निर्देश दिए।
दोपहर बाद पीड़िता और आरोपी दोनों विशाखा कमेटी के सामने पेश हुए। कमेटी ने दोनों के बयान दर्ज किए। आरोपी पुरुष रेजिडेंट डॉक्टर ने कमेटी के सामने खुद को कुंवारा बताया और महिला डॉक्टर से शादी की बात को पूरी तरह खारिज कर दिया।
कुंवारे होने के मांगे सबूत
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के अनुसार, विशाखा कमेटी ने आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर से कुंवारा होने के प्रमाण मांगे हैं। पीड़िता ने अपनी लिखित शिकायत में आरोपी की पहली डॉक्टर पत्नी का जिक्र किया है। ऐसे में कमेटी ने स्पष्ट किया है कि या तो उस महिला डॉक्टर को पेश किया जाए या फिर आरोपी को शपथ पत्र देना होगा, जिसमें कुंवारा होने और पीड़िता से किसी प्रकार के संबंध न होने की बात लिखित रूप में देनी होगी। जांच देर रात तक जारी रही और मंगलवार को फैसले की संभावना जताई गई है।
आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर ने नीट पीजी काउंसिलिंग के माध्यम से करीब डेढ़ साल पहले केजीएमयू में दाखिला लिया था। दाखिले के समय उसने खुद को कुंवारा बताया था, जिसका उल्लेख आवेदन फॉर्म में भी है। विशाखा कमेटी के सामने भी उसने यही दावा दोहराया। वहीं, पीड़िता को करीब एक साल पहले केजीएमयू में दाखिला मिला था, जिसके बाद दोनों के बीच संपर्क और बातचीत शुरू हुई।
पश्चिम बंगाल निवासी छात्रा से जुड़ा है मामला
इस पूरे मामले में पश्चिम बंगाल की निवासी महिला रेजिडेंट डॉक्टर के पिता ने खटीमा निवासी रेजिडेंट डॉक्टर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पिता का कहना है कि शादी से पहले उनकी बेटी पर धर्म बदलने का दबाव बनाया गया। मना करने पर उसे लगातार परेशान किया गया, जिससे मानसिक रूप से टूटकर उनकी बेटी ने 17 दिसंबर को आत्महत्या का प्रयास किया।
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