Diabetes के मरीजों पर मंडरा रहा Heart Attack का खतरा

Sandesh Wahak Digital Desk: नया साल आने में भले ही कुछ ही दिन बचे हों, लेकिन सेहत की तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है। यह कोई न्यू ईयर पार्टी नहीं, बल्कि शरीर को मजबूत बनाने का संकल्प है। सच यही है कि नया साल कैलेंडर से नहीं, आदतों से शुरू होता है। जो आदतें आज चल रही हैं, वही आगे भी चलेंगी। इसलिए “1 जनवरी से करेंगे” वाली सोच छोड़कर नए साल से पहले ही लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों पर वार जरूरी है। इसी कड़ी में पहला वार उस बीमारी पर है जो दिखती नहीं, लेकिन धीरे-धीरे पूरी जिंदगी पर कब्जा कर लेती है, यानी Pre- Diabetes

Pre- Diabetes खतरे की घंटी

अगर ब्लड शुगर अभी डायबिटीज (Diabetes) की रेंज में नहीं है, लेकिन नॉर्मल से ऊपर है, तो यह साफ संकेत है कि आप डायबिटीज के दरवाजे पर खड़े हैं। यह वह स्टेज है जहां वक्त रहते संभलना बेहद जरूरी है। बार-बार प्यास लगना, ज्यादा भूख लगना, जल्दी-जल्दी यूरिन आना, अचानक वजन बढ़ना और हर वक्त थकान महसूस होना ऐसे संकेत हैं जिन्हें कभी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डराने वाली बात यह है कि करीब 70 प्रतिशत प्री-डायबिटिक लोगों को यह पता ही नहीं होता कि वे टाइप-2 डायबिटीज (Type – 2 Diabetes), हार्ट, किडनी और आंखों की बीमारियों की ओर बढ़ रहे हैं।

भारत में Diabetes बनती जा रही आदत

WHO की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में डायबिटीज अब सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि आदत बनती जा रही है। 40 साल से कम उम्र के लोग, युवा और यहां तक कि बच्चे भी इसकी चपेट में हैं। जंक फूड, कम फिजिकल एक्टिविटी और बिगड़ा हुआ लाइफस्टाइल इसकी सबसे बड़ी वजह है। भारत में डायबिटीज (Diabetes) के मरीजों की संख्या 10 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है, जिनमें से लगभग आधे लोगों को अपनी बीमारी का पता तक नहीं है। पिछले चार सालों में डायबिटीज के मरीजों की संख्या में 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

Diabetes

एक बड़ी गलतफहमी यह है कि जिम जाने से सब कुछ ठीक हो जाता है। एक्सरसाइज जरूरी है, लेकिन सिर्फ इससे शुगर कंट्रोल नहीं होती। जब तक खान-पान और नींद ठीक नहीं होगी, तब तक सेहत भी ठीक नहीं रहेगी। अच्छी बात यह है कि अगर कोई व्यक्ति प्री-डायबिटिक स्टेज में है, तो सही डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और वजन कंट्रोल के जरिए डायबिटीज को रोका जा सकता है और कई मामलों में रिवर्स भी किया जा सकता है। प्री-डायबिटीज बीमारी नहीं, बल्कि चेतावनी है, और जो इसे समय पर समझ लेता है, उसकी जिंदगी डायबिटीज (Diabetes) से बच सकती है।

Diabetes से शरीर के अहम अंगों को खतरा

डायबिटीज सिर्फ शुगर तक सीमित नहीं रहती। यह दिमाग, आंखों, दिल, लिवर, किडनी और जोड़ों तक को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके लक्षणों में ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, बहुत भूख लगना, वजन घटना, चिड़चिड़ापन, थकान, कमजोरी और धुंधला दिखना शामिल हैं। नॉर्मल शुगर लेवल में खाने से पहले शुगर 100 से कम और खाने के बाद 140 से कम होनी चाहिए। प्री-डायबिटीज में यह स्तर बढ़ जाता है और डायबिटीज में यह सीमा पार कर जाता है।

सर्दियों के मौसम में डायबिटीज के मरीजों को डाइट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। खुद को गर्म रखना, हाई कैलोरी फूड से बचना और नियमित वर्कआउट करना जरूरी है। आधा घंटा धूप में बैठना भी फायदेमंद माना गया है। शुगर कंट्रोल के लिए खीरा, करेला और टमाटर का जूस, गिलोय का काढ़ा, मंडूकासन, योगमुद्रासन और 15 मिनट कपालभाति को लाभकारी बताया गया है।

Diabetes से बचाव की राह

डायबिटीज से बचाव का रास्ता डर से नहीं, समझदारी से निकलता है। सही समय पर चेतावनी को पहचानना ही सबसे बड़ा इलाज है। इसी विषय पर आगे डायबिटीज को कंट्रोल करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के तरीकों को लेकर योगगुरु स्वामी रामदेव के विचारों के जरिए समझा जाएगा कि कैसे सही आदतें अपनाकर इस बीमारी को जिंदगी में आने से रोका जा सकता है।

 

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