लखनऊ: पूर्व सांसद धनंजय सिंह और ब्लॉक प्रमुख विनय सिंह पर FIR, इंस्पेक्टर लाइन हाजिर

Sandesh Wahak Digital Desk: राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके सुशांत गोल्फ सिटी में स्थित स्वस्तिका सिटी कॉलोनी में रास्ता कब्जाने और दबंगई करने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। पुलिस ने पूर्व सांसद धनंजय सिंह, जौनपुर के महाराजगंज ब्लॉक प्रमुख विनय सिंह और उनके सरकारी गनर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। वहीं, इस मामले में लापरवाही बरतने पर पुलिस कमिश्नर ने सुशांत गोल्फ सिटी के इंस्पेक्टर को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है।

विवाद की जड़: 20 फीट का आम रास्ता

मामला कॉलोनी के नक्शे में दर्ज 20 फीट चौड़े रास्ते पर अवैध कब्जा करने से शुरू हुआ। आरोप है कि सोमवार को ब्लॉक प्रमुख विनय सिंह ने अपने प्लॉट के पास स्थित 20 फीट के आम रास्ते पर दीवार खड़ी कर उसे बंद करने की कोशिश की। जबकि रजिस्ट्री और नक्शे के अनुसार वह रास्ता सार्वजनिक था।

जब कॉलोनी के लोगों (महिलाओं और बच्चों सहित) ने इसका विरोध किया, तो विनय सिंह और उनके असलहाधारियों ने उन्हें धमकाया। मंगलवार को इस झड़प के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।

धनंजय सिंह का नाम और धमकी के आरोप

शिकायतकर्ता द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में बेहद गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि विवाद के दौरान विनय सिंह फोन पर पूर्व सांसद धनंजय सिंह से लोगों को धमकी दिलवा रहा था। विनय सिंह ने कथित तौर पर कहा, “जिसे चाहूंगा जान से मरवा दूंगा।” शिकायत में कॉलोनी की महिलाओं पर छींटाकशी करने और डराने-धमकाने का भी जिक्र है।

पुलिस कमिश्नर का सख्त एक्शन

शुरुआत में स्थानीय पुलिस का रवैया सवालों के घेरे में रहा। आरोप था कि इंस्पेक्टर ने पीड़ितों की सुनने के बजाय उल्टा आरोपियों के पक्ष में काम किया। पीड़ितों ने जब पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र सेंगर से मुलाकात कर रजिस्ट्री के दस्तावेज दिखाए, तो उन्होंने लापरवाही बरतने वाले इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह को तत्काल लाइन हाजिर कर दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मामले की गहराई से जांच की जा रही है।

अवैध कब्जे की कोशिश

जौनपुर के महाराजगंज ब्लॉक प्रमुख विनय सिंह का यहां एक प्लॉट है। आरोप है कि सोमवार को उन्होंने अपने प्लॉट के पास स्थित उस रास्ते पर दीवार खड़ी कर उसे बंद करने की कोशिश की, जो कॉलोनी के अन्य निवासियों के आने-जाने का एकमात्र मार्ग था।

कॉलोनी के नक्शे और खुद विनय सिंह की रजिस्ट्री के दस्तावेजों में भी उस रास्ते को ‘सार्वजनिक मार्ग’ दर्शाया गया है। इसके बावजूद बाहुबली रसूख के दम पर उसे निजी संपत्ति बनाने का प्रयास किया गया।

बाहुबल और धमकियों का आरोप

जब कॉलोनी के नागरिकों, महिलाओं और बुजुर्गों ने इस अवैध निर्माण का विरोध किया, तो मामला हिंसक मोड़ लेने लगा। आरोप है कि विनय सिंह अपने सरकारी गनर और 8-10 निजी हथियारबंद साथियों के साथ मौके पर मौजूद थे और विरोध करने वालों को डरा-धमका रहे थे। एफआईआर के अनुसार, विनय सिंह खुद को पूर्व सांसद धनंजय सिंह का करीबी रिश्तेदार बताकर धौंस जमा रहा था। आरोप यह भी है कि उसने फोन पर धनंजय सिंह से भी कुछ लोगों को धमकी दिलवाई।

पुलिस की संदिग्ध भूमिका और ‘लाइन हाजिर’

इस मामले में सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस की भूमिका शुरुआत में बेहद विवादास्पद रही। जब पीड़ित नागरिक थाने पहुंचे, तो तत्कालीन इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह ने उनकी सुनने के बजाय उल्टा विनय सिंह की तहरीर पर कॉलोनी वालों के खिलाफ ही केस दर्ज कर लिया।

मंगलवार को जब निवासियों ने पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र कुमार सेंगर से मुलाकात कर सबूत और वीडियो दिखाए, तो कमिश्नर ने इसे गंभीर लापरवाही माना। उन्होंने तुरंत इंस्पेक्टर उपेंद्र सिंह को लाइन हाजिर (सस्पेंड जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई) कर दिया और पीड़ितों की तहरीर पर नई एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।

दर्ज एफआईआर और आरोपी

अब पुलिस ने पूर्व सांसद धनंजय सिंह, ब्लॉक प्रमुख विनय सिंह और उनके गनर के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। इसमें जबरन रास्ता रोकने, डराने-धमकाने (Criminal Intimidation), और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अब घटना के समय के सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो की जांच कर रही है ताकि आरोपियों की लोकेशन और भूमिका स्पष्ट हो सके।

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