इंदिरा गांधी शांति पुरस्कार 2025: मानवाधिकारों की बुलंद आवाज ग्रासा माशेल को मिलेगा यह सम्मान

Sandesh Wahak Digital Desk: अंतरराष्ट्रीय जूरी ने इस साल का प्रतिष्ठित इंदिरा गांधी शांति, निरस्त्रीकरण और विकास पुरस्कार अफ्रीका की मशहूर राजनेता और मानवाधिकार कार्यकर्ता ग्रासा माशेल को देने का निर्णय लिया है। भारत के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन की अध्यक्षता वाली जूरी ने ग्रासा माशेल के उस संघर्ष को सलाम किया है, जो उन्होंने समाज के कमजोर तबकों और न्यायपूर्ण दुनिया के लिए जीवनभर लड़ा है।

कौन हैं ग्रासा माशेल

17 अक्टूबर, 1945 को मोजाम्बिक के एक छोटे से गाँव में जन्मीं ग्रासा माशेल की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। लिस्बन विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने मोजाम्बिक की आजादी के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। 1975 में आजादी मिलने के बाद वे देश की पहली शिक्षा और संस्कृति मंत्री बनीं। उनके कार्यकाल में स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई। 1996 में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के लिए एक ऐतिहासिक रिपोर्ट तैयार की, जिसमें बताया गया कि युद्ध और सशस्त्र संघर्ष बच्चों के जीवन को कैसे तबाह करते हैं। इस रिपोर्ट ने दुनिया भर की सरकारों की सोच बदल दी।

सामाजिक परिवर्तन की नायक

ग्रासा माशेल सिर्फ राजनीतिज्ञ नहीं, बल्कि एक बदलाव लाने वाली शख्सियत रही हैं।

संस्थाओं की नींव: वे ‘द एल्डर्स’ की संस्थापक सदस्य हैं और बाल विवाह के खिलाफ लड़ने वाली संस्था ‘गर्ल्स नॉट ब्राइड्स’ में उनकी अहम भूमिका रही है।

आर्थिक सशक्तीकरण: 2010 में उन्होंने ‘ग्रासा माशेल ट्रस्ट’ बनाया, जो महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और खाद्य सुरक्षा की दिशा में काम करता है।

वैश्विक सम्मान: उन्हें पहले भी संयुक्त राष्ट्र के नैनसेन शरणार्थी पुरस्कार और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के गोल्ड मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।

Also Read: प्रतापगढ़ जिला कारागार में HIV केस मिलने से हड़कंप, 7 किन्नर मिले पॉजिटिव

Get real time updates directly on you device, subscribe now.