बरेली: सस्पेंड हुए PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ‘हाउस अरेस्ट’! बोले- ‘कंपाउंड को मिनी जेल बना दिया गया है’

Sandesh Wahak Digital Desk: बरेली के पूर्व सिटी मजिस्ट्रेट और चर्चित पीसीएस (PCS) अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री का मामला अब और भी गंभीर हो गया है। इस्तीफा देने और सस्पेंशन के बाद मंगलवार रात अलंकार अग्निहोत्री ने सनसनीखेज दावा किया कि उन्हें ‘हाउस अरेस्ट’ कर लिया गया है। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि जिस एडीएम कंपाउंड में वह रह रहे हैं, उसे ‘मिनी जेल’ में बदल दिया गया है।

‘निकलने की आजादी छिनी, जैमर लगाने की तैयारी’

अलंकार अग्निहोत्री ने मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए अपनी आपबीती साझा की। अग्निहोत्री ने कहा, “मेरा संवैधानिक हक है कि मैं कहीं भी आ-जा सकूं, लेकिन मुझे बाहर नहीं जाने दिया जा रहा। मैं खाना खाने भी बाहर नहीं निकल पा रहा हूं।”

उन्होंने व्हाट्सएप स्टेटस लगाकर आशंका जताई कि कंपाउंड में ‘जैमर’ लगाए जा रहे हैं ताकि उनका संपर्क बाहरी दुनिया से काट दिया जाए। उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि अगर उनका फोन बंद हो जाए (अनरीचेबल), तो हाईकोर्ट में अनुच्छेद 226 के तहत रिट दाखिल करें और इसकी जानकारी पीएमओ (PMO) व सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाएं।

एडीएम कंपाउंड बना ‘पुलिस छावनी’

मंगलवार रात प्रशासन ने एडीएम कंपाउंड की सुरक्षा को अभूतपूर्व स्तर पर बढ़ा दिया। पुलिस और पीएसी (PAC) के जवानों ने पूरे परिसर को घेर लिया है। एक गेट पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जबकि दूसरे पर कड़ी पूछताछ के बाद ही एंट्री मिल रही है। कंपाउंड में अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। प्रशासन उन लोगों की लिस्ट तैयार कर रहा है जो पिछले दो दिनों में अग्निहोत्री से मिलने आए थे। अब किसी भी समर्थक या बाहरी व्यक्ति को परिसर के अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है।

क्या प्रशासन को ‘साजिश’ का शक है?

सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन इस बात की भी जांच कर रहा है कि कहीं अलंकार अग्निहोत्री ने किसी के बहकावे या किसी राजनीतिक प्रभाव में आकर तो यह कदम नहीं उठाया। शासन स्तर से बरेली के आला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इस मामले का जल्द से जल्द समाधान निकाला जाए ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े।

पूरा विवाद एक नजर में

अलंकार अग्निहोत्री ने प्रयागराज माघ मेले में संतों के साथ हुई कथित बदसलूकी और यूजीसी के नए नियमों के विरोध में 26 जनवरी को इस्तीफा दिया था। उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली को ‘भ्रमतंत्र’ करार दिया था, जिसके बाद उन्हें निलंबित कर शामली अटैच कर दिया गया।

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