खतरनाक साबित हो सकता है बच्चों के कान में Oil डालना!
Sandesh Wahak Digital Desk: भारत में आयुर्वेदिक और घरेलू नुस्खों पर लोगों का भरोसा लंबे समय से रहा है। इसी भरोसे के चलते कई माता-पिता बच्चों की छोटी-मोटी परेशानियों में घरेलू उपाय आजमाने लगते हैं। बच्चों के कान में तेल (Oil) डालना भी ऐसा ही एक आम घरेलू नुस्खा है, जिसे ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ शहरों में भी सामान्य माना जाता है। कान में दर्द, ड्राईनेस या मैल की समस्या होने पर कई माता-पिता सरसों के तेल (Oil) की कुछ बूंदें बच्चे के कान में डाल देते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह तरीका वास्तव में सुरक्षित है या फिर बच्चों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
कान दर्द के पीछे छिपी हो सकती है गंभीर वजह
एक्सपर्ट्स का कहना है कि बच्चों के कान में होने वाला दर्द अक्सर किसी अंदरूनी समस्या का संकेत होता है। कई बार इसके पीछे इंफेक्शन कारण बनता है, तो कभी कोई दूसरी मेडिकल समस्या भी इसकी वजह हो सकती है। डॉ. रवि मेहर के अनुसार अगर बच्चे के कान में दर्द हो रहा है तो उस स्थिति में बिना जांच के किसी भी तरह का तेल (Oil) कान में डालना बिल्कुल गलत है। तेल (Oil) डालने से न तो इंफेक्शन खत्म होता है और न ही दर्द में राहत मिलती है, बल्कि कई मामलों में परेशानी और बढ़ सकती है।
Oil डालने से बढ़ सकता है इंफेक्शन का खतरा
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर बच्चे के कान में तेज दर्द है तो इसकी वजह इंफेक्शन हो सकता है। ऐसी स्थिति में तेल (Oil) डालने से कान के अंदर बैक्टीरिया या फंगल और ज्यादा पनप सकते हैं। इससे सूजन, जलन और दर्द की समस्या और गंभीर हो सकती है। कुछ मामलों में कान का पर्दा फटने की आशंका भी रहती है और उस समय तेल (Oil) डालना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। अगर कान से मवाद या पानी आ रहा हो तो भूलकर भी कान में तेल नहीं डालना चाहिए।
जुकाम और बुखार में भी हो सकता है कान दर्द
एक्सपर्ट्स के अनुसार बच्चों को जुकाम या बुखार होने पर भी कान में दर्द की शिकायत हो सकती है। ऐसे मामलों में घरेलू नुस्खे आजमाने के बजाय सीधे डॉक्टर या पीडियाट्रिशन को दिखाना सबसे सही विकल्प होता है। सही जांच के बाद ही यह पता चल पाता है कि दर्द की असली वजह क्या है और किस तरह का इलाज जरूरी है।
वहीं अगर बच्चे को कान में दर्द या किसी भी तरह की परेशानी हो रही है तो उसे ईएनटी डॉक्टर को दिखाना सबसे बेहतर होता है। घरेलू नुस्खों पर भरोसा करना कई बार बड़े नुकसान का कारण बन सकता है। कान की सफाई के लिए ईयर बड का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन उसे कान के अंदर तक डालने की गलती नहीं करनी चाहिए। मेडिकल ईयर ड्रॉप्स का इस्तेमाल भी हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए।
इन संकेतों को नजरअंदाज न करें
दरअसल अगर बच्चे को कान में कोई दिक्कत है तो वह बार-बार रो सकता है और बार-बार अपने कान को पकड़ सकता है। इसके अलावा उसे सुनने में भी परेशानी महसूस हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखने पर पीडियाट्रिशन या एक्सपर्ट की सलाह के अनुसार दवा देना जरूरी होता है और बच्चे का खास ख्याल रखना चाहिए।
बच्चे को नहलाते समय इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए कि उसके कान में पानी या साबुन न जाए। ठंड के मौसम में बच्चे के कान को ढक कर रखना चाहिए, क्योंकि ठंडी हवा की वजह से कान की समस्या और बढ़ सकती है। अगर कोई घरेलू उपाय आजमाना ही हो तो गर्म कपड़े से हल्की सिकाई की जा सकती है, लेकिन बच्चों के मामले में किसी भी उपाय से पहले एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है। केवल तेल (Oil) डालना समस्या का समाधान नहीं है।
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