‘केशव चाचा न्याय करो’ के नारों से गूंजा डिप्टी सीएम का आवास, 69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों ने जताई नाराजगी
Sandesh Wahak Digital Desk: 69000 शिक्षक भर्ती के आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का सब्र एक बार फिर जवाब दे गया। सोमवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के घर जा पहुंचे और वहीं धरने पर बैठ गए। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई न हो पाने और सरकार के ‘ढीले रवैये’ से नाराज अभ्यर्थियों ने वहां जोरदार नारेबाजी की।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने डिप्टी सीएम पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछली मुलाकातों में केशव प्रसाद मौर्य ने ‘त्वरित न्याय’ का भरोसा दिया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी नतीजा सिफर रहा। पटेल ने तंज कसते हुए कहा, “डिप्टी सीएम की त्वरित न्याय वाली टिप्पणी ‘हाथी के दांत खाने के और दिखाने के और’ जैसी साबित हुई है। त्वरित न्याय की भी कोई समय सीमा होती है, महीनों तक लटकाना न्याय नहीं है।”
हाईकोर्ट के फैसले पर सरकार को घेरा
अभ्यर्थियों का आरोप है कि लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 13 अगस्त 2024 को उनके पक्ष में स्पष्ट फैसला सुनाया था। सरकार चाहती तो नियमों का पालन कर उसी वक्त नियुक्तियां दे सकती थी, लेकिन सरकार ने हीला-हवाली की, जिससे मामला अब सुप्रीम कोर्ट की पेचीदगियों में फंस गया है।
पुलिस ने जबरन हटाया
डिप्टी सीएम के आवास पर बढ़ते हंगामे को देख मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया और बसों में भरकर धरना स्थल (ईको गार्डन) भेज दिया। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पिछड़े, दलित और गरीब परिवारों से आते हैं और सरकार व अधिकारियों के इस रवैये से बुरी तरह हताश हो चुके हैं।
इस घेराव में अमरेंद्र पटेल के साथ विक्रम यादव, अमित मौर्या, अनिल कुमार, अर्चना मौर्या, कल्पना और शशि पटेल सहित सैकड़ों अभ्यर्थी शामिल रहे। इन सभी का एक ही सुर में कहना है कि जब तक उन्हें नियुक्ति नहीं मिल जाती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
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