Cancer के इलाज में नई उम्मीद, इम्यूनोथरेपी और टारगेटेड थेरेपी का बढ़ा इस्तेमाल
Sandesh Wahak Digital Desk: आज के दौर में कैंसर (Cancer) के इलाज में इम्यूनोथरेपी और टारगेटेड थेरेपी का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ये दोनों थेरेपी पारंपरिक कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी से अलग हैं और आधुनिक चिकित्सा में पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट का हिस्सा बन चुकी हैं। दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल के ऑन्कोलॉजी विभाग के डॉ. रोहित कपूर के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में कैंसर के इलाज का तरीका बदला है और अब मरीज की स्थिति के अनुसार इलाज तय किया जाता है।
क्या हैं टारगेटेड और इम्यूनोथरेपी?
टारगेटेड थेरेपी कैंसर (Cancer) कोशिकाओं के विशेष जीन या प्रोटीन को निशाना बनाकर उन पर हमला करती है। इसका फायदा यह होता है कि यह सीधे कैंसर सेल्स को प्रभावित करती है और हेल्दी सेल्स को कम नुकसान पहुंचाती है। यह थेरेपी खासतौर पर ब्रेस्ट कैंसर और कोलोरेक्टल कैंसर के मरीजों में उपयोगी मानी जाती है।
वहीं इम्यूनोथरेपी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाकर कैंसर कोशिकाओं से लड़ने में मदद करती है। यह थेरेपी उन कैंसर सेल्स पर भी असर डालती है जो सामान्य इलाज से छुपे रह जाते हैं और मरीज के जीवन को लंबा करने में सहायक होती है।
लंग और ब्लड Cancer में दिखा बेहतर असर
दरअसल ये दोनों थेरेपी खासकर लंग कैंसर (Lung Cancer) और कुछ प्रकार के ब्लड कैंसर में काफी प्रभावी साबित हुई हैं। इनके इस्तेमाल से मरीज के जीवन को बढ़ाया जा सकता है और बीमारी को लंबे समय तक नियंत्रित रखा जा सकता है। पारंपरिक इलाज की तुलना में इनका असर कई मामलों में बेहतर देखा गया है।
इलाज का असर मरीज की स्थिति पर निर्भर
दरअसल इन थेरेपी का प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज के कैंसर (Cancer) की स्टेज क्या है और उपचार पर उसकी प्रतिक्रिया कैसी है। हालांकि ये आधुनिक और एडवांस इलाज हैं, लेकिन इन्हें पूरी तरह साइड इफेक्ट से मुक्त नहीं माना जा सकता है। इसके बावजूद इनसे बीमारी को लंबे समय तक नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
दरअसल इन थेरेपी को शुरू करने से पहले मरीज के कई तरह के परीक्षण किए जाते हैं। जिन मरीजों में यह पाया जाता है कि यह इलाज प्रभावी हो सकता है, केवल उन्हें ही यह थेरेपी दी जाती है। इसके साथ ही इनका खर्च भी काफी अधिक होता है, जो हर मरीज के लिए संभव नहीं होता।
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