KGMU: महिला आईएएस ने फंसाया सौ करोड़ की खरीद में पेंच
केजीएमयू में चिकित्सकीय उपकरणों की खरीद प्रक्रिया पर कड़ा पत्र लिखकर उठाये गंभीर सवाल
Sandesh Wahak Digital Desk: केजीएमयू में दवा और उपकरणों समेत नियुक्तियों में घोटालों के गंभीर आरोप अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। बीते एक दशक में कई वीसी व रजिस्ट्रार के ऊपर भी भ्रष्टाचार के आरोप खुद यहां के शिक्षक संघ ने लगाए हैं।
लेकिन किसी का भी बाल बांका नहीं बिगड़ा। केजीएमयू एक बार फिर चर्चा में है। इस बार शासन की महिला आईएएस ने सौ करोड़ के मेडिकल उपकरणों की खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अफसरों की मंशा पर मानो पानी फेरा है। लगता है पहले की तरह इस बार भी मामले को निपटाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया जाएगा।
मरीजों के इलाज, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और ट्रॉमा सेंटर के पास नई डायग्नोस्टिक बिल्डिंग के निर्माण के वास्ते केजीएमयू को वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1938 करोड़ का बजट आवंटित हुआ है। तकरीबन 300 करोड़ की लागत से मेडिकल उपकरण भी खरीदे जाने हैं। एक माह पहले केजीएमयू की 74वीं हाई लेवल परचेज कमेटी (एचएलपीसी) की बैठक हुई। जिसमें चिकित्सा शिक्षा विभाग की विशेष सचिव कृतिका शर्मा, केजीएमयू से रजिस्ट्रार अर्चना गहरवार, फाइनेंस अफसर संतोष शर्मा समेत फॉरेंसिक, प्लास्टिक सर्जरी व जनरल सर्जरी विभाग के अध्यक्ष समेत अन्य सदस्य शामिल हुए। परचेज कमेटी की बैठक में एमआरआई, लेजर, मैमोग्राफी समेत दूसरी खरीदी जाने वाली अहम मशीनों की सूची रखी गयी।
कंज्यूमेबल आइटमों संग मशीनों की खरीद से बढ़ रहीं कीमतें
कमेटी की बैठक के बाद विशेष सचिव कृतिका शर्मा ने चिकित्सकीय उपकरणों संग सहयोगी वस्तुओं (कंज्यूमेबल आइटम) की खरीद पर आपत्ति लगाते हुए कड़ा पत्र लिख डाला। जेम पोर्टल के जरिये उपकरणों की खरीद-फरोख्त को तो उन्होंने ठीक बताया। लेकिन साथ में कंज्यूमेबल आइटम को लेने को उचित नहीं करार दिया। पत्र के मुताबिक खरीद की इस प्रक्रिया से चिकित्सकीय मशीनों की कीमतें बढ़ रही हैं।
अंदरखाने के मुताबिक आपत्ति केजीएमयू के कुछ वरिष्ठ अफसरों को कतई रास नहीं आ रही है। करीब सौ करोड़ की कई मशीनें विभागों में इंस्टाल होनी हैं। फिलहाल ऊंट किस करवट बैठेगा, यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा।
नियमानुसार खरीद-फरोख्त हो रही: प्रवक्ता
केजीएमयू के प्रवक्ता केके सिंह ने कहा कि नियमानुसार मशीनों की खरीद-फरोख्त हो रही है। मरीजों को किफायती इलाज मुहैया कराने की दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं। वहीं रेडियो डायग्नोसिस, जनरल सर्जरी, सर्जिकल आंकोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी समेत दूसरे विभागों में मशीनें लगनी हैं।
सुर्खियों में रहे कई वीसी, कार्रवाई धेरा भर नहीं
वीसी रहे चुके रविकांत, एमएलबी भट्ट, बिपिन पुरी, डीके गुप्ता समेत कई बड़ों पर भ्रष्टाचार के आरोप पूर्व में लगे थे। शासन से लेकर लोकायुक्त तक शिकायतों-पत्रों का दौर चला। कभी शिकंजा नहीं कस पाया। उलटे पुन: मलाईदार तैनातियां दे डाली गयीं। जांच कमेटियां गठित तो हुईं, नतीजा सिर्फ ढाक के तीन पात के बराबर निकला।
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