NASA का मिशन आर्टेमिस-II लॉन्च: 50 साल बाद चांद की ओर लौटे इंसान, अश्वेत अंतरिक्ष यात्री रचेंगे इतिहास
Sandesh Wahak Digital Desk: आज भारतीय समयानुसार, नासा ने अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) के जरिए आर्टेमिस-II मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से हुई इस उड़ान के साथ ही चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा की 10 दिवसीय यात्रा पर निकल चुके हैं। यह मिशन 1972 के अपोलो 17 के बाद चंद्रमा के पास जाने वाला पहला मानव मिशन है।
मिशन के ‘ऐतिहासिक’ चार नायक
इस बार का क्रू (Crew) अपनी विविधता के लिए पूरी दुनिया में चर्चा का विषय है।
रीड वाइसमैन (कमांडर): मिशन का नेतृत्व कर रहे अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री।
विक्टर ग्लोवर (पायलट): चंद्रमा की ओर जाने वाले पहले अश्वेत (Person of Color) अंतरिक्ष यात्री।
क्रिस्टीना कोच (मिशन स्पेशलिस्ट): चंद्रमा के मिशन पर जाने वाली दुनिया की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री।
जेरेमी हैनसेन (मिशन स्पेशलिस्ट): इस मिशन में शामिल होने वाले पहले कनाडाई (गैर-अमेरिकी) नागरिक।
10 दिनों का रोमांचक सफर
ओरियन (Orion) कैप्सूल पृथ्वी की कक्षा में रहकर अपने लाइफ सपोर्ट, नेविगेशन और कम्युनिकेशन सिस्टम की जांच करेगा। यह यान चंद्रमा की सतह पर उतरेगा नहीं, बल्कि उसकी सतह से गुजरते हुए करीब 6,400 किमी आगे तक जाएगा। ये अंतरिक्ष यात्री मानव इतिहास में पृथ्वी से सबसे अधिक दूरी तय करने वाले व्यक्ति बन सकते हैं। यात्रा के दौरान वे चंद्रमा को एक बास्केटबॉल के आकार में देखेंगे और अंतरिक्ष से आंशिक सूर्य ग्रहण का अद्भुत नजारा भी लेंगे।
मिशन का मुख्य उद्देश्य
आर्टेमिस-II का मकसद केवल चंद्रमा के पास जाना नहीं, बल्कि भविष्य के मंगल मिशन (Mars Mission) की नींव रखना है।
तकनीकी परीक्षण: ओरियन कैप्सूल के टॉयलेट, पानी और ऑक्सीजन सिस्टम (Life Support) की गहरे अंतरिक्ष में टेस्टिंग।
चंद्रमा पर स्थायी बेस: यह मिशन आर्टेमिस-III के लिए रास्ता साफ करेगा, जिसमें इंसानों को चंद्रमा की सतह पर उतारा जाएगा और वहां स्थायी बेस बनाने की तैयारी शुरू होगी।
चुनौतियां और जोखिम
गहरे अंतरिक्ष की यह यात्रा जोखिमों से भरी है। इससे पहले SLS रॉकेट में हाइड्रोजन लीक जैसी तकनीकी बाधाएं आ चुकी हैं। हालांकि, नासा के विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिशन साबित करेगा कि इंसान लंबी अवधि तक गहरे अंतरिक्ष में सुरक्षित रह सकते हैं।

