किडनी रैकेट का असली मैनेजर है लखनऊ के नामी अस्पताल का डॉ. रोहित, 50 अस्पताल रडार पर और करोड़ों की काली कमाई!

Sandesh Wahak Digital Desk: कानपुर का अंतरराष्ट्रीय किडनी तस्करी रैकेट बेहद संगठित है। जरूरतमंदों को चंद लाख देने का झांसा देकर उनकी किडनी का सौदा रईस मरीजों से करने की योजना बेहद फुलप्रूफ बनती थी।

परदे के पीछे से इस रैकेट ने अभी तक विदेशियों से लेकर भारत के कई शहरों के लोगों को दर्जनों किडनी ट्रांसप्लांट करके रैकेट को करोड़ों की काली कमाई करायी है। इसके तार लखनऊ में बैठे चंद ऐसे रसूखदार डॉक्टरों से जुड़े हैं। जो परदे के पीछे से पूरे खेल के असल मास्टरमाइंड हैं।

50 अस्पताल रडार पर, कई जिलों में छापे

तकरीबन 50 से ज्यादा अस्पताल फिलहाल जांच के रडार पर हैं। सबसे प्रमुख खिलाड़ी लखनऊ के एक नामी अस्पताल का डॉक्टर रोहित बताया जा रहा है। जिसका मुख्य काम मालदार मरीजों से लेकर कुशल डॉक्टरों की व्यवस्था से जुड़ा है। एजेंसियों ने लखनऊ के इस बड़े अस्पताल के खिलाफ जांच शुरू की है। दिल्ली से लेकर यूपी के कई शहरों तक छापेमारी का दौर भी शुरू हो गया है। कानपुर और लखनऊ के नौ निजी अस्पतालों/नर्सिंग होम में पिछले दो साल में 50 से अधिक किडनी ट्रांसप्लांट हुए हैं। लखनऊ के नामी अस्पताल का डॉक्टर रोहित ही रुपयों के बंटवारे से लेकर बाकी व्यवस्थाएं मैनेज करता था।

लखनऊ का आरोपी नामी अस्पताल महंगे इलाज के लिए जाना जाता है। इसके लिंक दिल्ली और नोएडा समेत विदेशों में स्थित कई बड़े अस्पतालों से हैं। जहां से मरीजों को भेजा जाता था। अस्पताल में आने वाले किडनी मरीजों को भी ट्रासंप्लांट के लिए कानपुर के नर्सिंग होम इसलिए भेजा जाता था, जिससे किसी को रत्ती भर भी शक नहीं हो। ट्रासंप्लांट डॉ रोहित और उनकी टीम करती थी। वहीं कई बार बाहर से भी डॉक्टर आते थे। पुलिस और एसटीएफ की टीमें डोनर, दलाल और सर्जन की तलाश में कई जिलों में दबिश दे रही है।

किडनी रैकेट का असली मैनेजर है लखनऊ के नामी अस्पताल का डॉ. रोहित

छह आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अन्य डॉक्टरों व सहयोगियों के नाम मिले हैं। कई जिलों के अस्पताल भी जांच के दायरे में है। फरार आरोपितों व नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

एस.एम. कासिम आबिदी, डीसीपी (पश्चिम), कानपुर

ताकतवर हस्तियों तक सीधी पहुंच, विदेश भागने की आशंका

लखनऊ के जिस नामी अस्पताल और उसके फरार डॉक्टर रोहित का नाम किडनी रैकेट में आया है। उसके कर्ताधर्ता ताकतवर हैं। सियासत-नौकरशाही की मजबूत हस्तियों तक सीधी पहुंच है। अस्पताल के कर्ताधर्ता एक नामी डॉक्टर की खूब काली कमाई यहां निवेश की गयी है। यह संचालक भी रैकेट का अहम हिस्सा हो सकता है। डॉ. रोहित इसके बेहद करीबियों में शुमार है। पुलिस को आशंका है कि आरोपी डॉक्टर विदेश भाग सकते है। डॉ. रोहित, डॉ. अफजल, वैभव व अनुराग के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी हो रहा है।

फर्जी रिश्तेदारी का ऐंगल, विदेशी मरीज भी आए

जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि कहीं फर्जी रिश्तेदारी और नकली कागजात के जरिए ट्रांसप्लांट को वैध दिखाने की कोशिश तो नहीं की गई। इस वर्ष तीन मार्च को साउथ अफ्रीका की महिला अरेबिका का भी किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था। ऐसे कई विदेशी मरीज हैं। जिनका रिकॉर्ड अस्पतालों में मौजूद नहीं है। आहूजा अस्पताल में दो साल से जरूरतमंदों को फंसाकर पांच से छह लाख में किडनी लेकर 60 लाख से एक करोड़ तक में बेची जा रही थी।

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