साहित्य इंसान को अपनी रूह में झांकने का सलीका सिखाता है: प्रो. मुश्ताक अहमद

Sandesh Wahak Digital Desk: साहित्य केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह मनुष्य की आंतरिक दुनिया का वह आईना है जो उसे बेहतर इंसानियत और गहरी चेतना (बसीरत) से जोड़ता है। यह विचार प्रसिद्ध साहित्यकार, शायर और सीएम कॉलेज दरभंगा के प्राचार्य प्रोफेसर मुश्ताक अहमद ने व्यक्त किए।

वह गया कॉलेज के उर्दू विभाग द्वारा आयोजित वर्तमान दौर में साहित्य की सार्थकता और महत्व विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान में बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे।

प्रो. मुश्ताक अहमद ने आज के दौर की चुनौतियों पर बात करते हुए कहा कि हम भौतिक और तकनीकी प्रगति तो कर रहे हैं, लेकिन भीतर से एक किस्म के अकेलेपन और शून्यता का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा, आज के मशीनी युग में साहित्य ही वह माध्यम है जो हमें अपनी जड़ों से जोड़कर रखता है।

साहित्य पढ़ने वाला व्यक्ति अधिक संतुलित, गंभीर और उदार होता है क्योंकि वह जीवन को केवल भावनाओं से नहीं, बल्कि तर्क और जिम्मेदारी के साथ समझता है। उन्होंने जोर दिया कि कहानियाँ और कविताएँ हमारे भीतर सहानुभूति पैदा करती हैं, जो एक सभ्य समाज की सबसे बड़ी जरूरत है।

जहान-ए-उर्दू के ऐतिहासिक अंक का लोकार्पण

इस अवसर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का जश्न भी मनाया गया। प्रो. मुश्ताक अहमद के संपादन में निकलने वाली प्रसिद्ध शोध पत्रिका जहान-ए-उर्दू के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में इसके विशेष दस्तावेजी अंक अज़ीमाबाद नंबर का लोकार्पण किया गया। यह अंक शोधार्थियों और उर्दू प्रेमियों के लिए एक बेशकीमती दस्तावेज माना जा रहा है।

कार्यक्रम में साहित्य जगत की कई नामी हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। डॉ. अहमद सगीर ने गया कॉलेज के उर्दू विभाग की सक्रियता की सराहना करते हुए कहा कि आज के डिजिटल शोर के बीच साहित्य ही हमें आत्ममंथन और ठहराव का मौका देता है। इसे क्रम में डॉ. मोहम्मद इमरान अरशद (विभागाध्यक्ष, एसएस कॉलेज) ने कहा कि साहित्य हर युग में मानव विकास के लिए अनिवार्य रहा है और रहेगा।

कार्यक्रम की शुरुआत में विभागाध्यक्ष डॉ. अब्दुल हई ने अतिथियों का शॉल और स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में साहित्य को सिर्फ पढ़ना ही नहीं, बल्कि जीवन में उतारना भी जरूरी है। मंच का सफल संचालन डॉ. मोहम्मद मिनहाजुद्दीन ने किया। उन्होंने प्रो. मुश्ताक अहमद के बहुआयामी व्यक्तित्व- प्रशासक, शोधकर्ता, शायर और पत्रकार से छात्रों का परिचय कराया। इस ज्ञानवर्धक सत्र में ग़ालिब जावेद, मोहम्मद चाँद आफ़ताब, अहमद सईद, अलीशा मलिक, आरज़ू परवीन सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और कर्मचारी मौजूद रहे।

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